दिल्ली में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Delhi SIR) को लेकर नया विवाद सामने आया है। चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया के दौरान करीब 33 लाख मतदाताओं को नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है। इन नोटिस की वजह मुख्य रूप से दो तरह की बताई गई है-‘Logical Discrepancy’ यानी रिकॉर्ड में तार्किक विसंगति और ‘Unmapped’ यानी पुराने रिकॉर्ड से जानकारी का लिंक न हो पाना।
सरल भाषा में समझें तो इसका मतलब है कि मतदाता द्वारा दिए गए विवरण में कुछ ऐसी जानकारी मिली जो पुराने रिकॉर्ड या दूसरे विवरणों से मेल नहीं खाती। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ मामलों में उम्र, माता-पिता या पारिवारिक विवरण से जुड़े आंकड़ों में असंगति मिलने पर भी नोटिस भेजे जा रहे हैं। वहीं, कुछ मतदाताओं की मौजूदा जानकारी 2002 की पिछली SIR सूची से लिंक नहीं हो पाई है।
विवाद किस बात पर है?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में सवाल उठाया गया है कि जिन लोगों को नोटिस दिया जा रहा है उनके नाम और नोटिस की वजह वेबसाइट पर स्पष्ट रूप से क्यों उपलब्ध नहीं कराई गई। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि लोगों को यह जानकारी आसानी से नहीं मिल रही कि उन्हें किस आधार पर ‘Logical Discrepancy’ या दूसरे टैग के तहत रखा गया है।
अब सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
इसी मुद्दे को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। चीफ जस्टिस के सामने याचिका का उल्लेख किया गया और अदालत ने इसे SIR से जुड़े मामलों के साथ सुनने पर सहमति जताई है। अब सुनवाई में यह मुद्दा अहम रहेगा कि नोटिस देने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है और प्रभावित मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए किस तरह की जानकारी और प्रक्रिया उपलब्ध होनी चाहिए।
इस बीच, दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में करीब 47.7 लाख नाम शामिल नहीं किए गए हैं। हालांकि, जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं उनके लिए दावा दाखिल कर दोबारा नाम शामिल कराने की प्रक्रिया उपलब्ध है।
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