दिल्ली(Delhi Traveling) से सिलीगुड़ी के बीच प्रस्तावित हाई स्पीड रेल कॉरिडोर को लेकर तैयारियां आगे बढ़ रही हैं। इस परियोजना में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है। यहां बुलेट ट्रेन का एक प्रमुख जंक्शन विकसित करने की योजना है। इसके अलावा अयोध्या को जोड़ने के लिए भी एक अलग कनेक्टिविटी कॉरिडोर प्रस्तावित है। रायबरेली में भी एक जंक्शन बनाए जाने की योजना है।
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) जल्द ही ग्लोबल RFP के माध्यम से कंसल्टेंसी एजेंसी का चयन करेगा। चुनी गई एजेंसी को करीब दो साल के भीतर पूरे कॉरिडोर का डिजाइन तैयार करना होगा। इसमें पुल, रेलवे ट्रैक, स्टेशन, डिपो, मेंटेनेंस सुविधाएं, एप्रोच लाइन और फीडर सेक्शन जैसी संरचनाओं की योजना शामिल होगी।
350 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार
प्रस्तावित कॉरिडोर डबल लाइन का होगा और इसकी डिजाइन 320 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी। इसके लिए मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना के मानकों के साथ अंतरराष्ट्रीय हाई स्पीड रेल कोड और मानकों को भी आधार बनाया जाएगा।
दो चरणों में पूरा होगा कॉरिडोर
परियोजना को दो चरणों में विकसित करने की योजना है। पहले चरण में दिल्ली से लखनऊ होते हुए वाराणसी तक लगभग 756 किलोमीटर का मार्ग होगा। इसमें दिल्ली के सराय काले खां से नोएडा, जेवर, मथुरा, आगरा, इटावा, कानपुर, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज और भदोही जैसे प्रमुख स्थान शामिल होंगे।
दूसरे चरण में वाराणसी से सिलीगुड़ी तक करीब 744 किलोमीटर का कॉरिडोर प्रस्तावित है। NHSRCL प्रस्तावित रूट का सर्वे पहले ही दो चरणों में पूरा कर चुका है। अब डिजाइन से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
यात्रा का समय होगा काफी कम
प्रस्तावित समय के अनुसार दिल्ली से लखनऊ करीब 2 घंटे 12 मिनट, लखनऊ से वाराणसी करीब 2 घंटे और वाराणसी से सिलीगुड़ी करीब 4 घंटे 41 मिनट में पहुंचने का अनुमान है। पूरे दिल्ली-सिलीगुड़ी सफर में लगभग 6 घंटे 45 मिनट लग सकते हैं।
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