आज 17 सितंबर, गुरुवार को भगवान विश्वकर्मा(Vishwakarma Puja) की जयंती मनाई जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व कन्या संक्रांति के दिन पड़ता है। जब सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करते हैं तो इस परिवर्तन को कन्या संक्रांति कहा जाता है। इसी अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। इस दिन मशीनों, औजारों, वाहनों, कारखानों और कार्यस्थल पर इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा करने की परंपरा है।
विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, 17 सितंबर को सुबह 7:58 बजे सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। पूजा के लिए तीन शुभ समय बताए गए हैं। सुबह 7:58 से 10:43 बजे, दोपहर 12:15 से 1:48 बजे और शाम 4:52 से 6:24 बजे तक पूजा की जा सकती है।
वहीं, दोपहर 1:48 से 3:20 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस अवधि में शुभ कार्य करने से बचने की मान्यता है।
कौन हैं भगवान विश्वकर्मा?
धार्मिक मान्यताओं में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का प्रथम शिल्पकार, वास्तुकार और कुशल निर्माणकर्ता माना गया है। मान्यता है कि उन्होंने इंद्रपुरी, लंका, द्वारका, हस्तिनापुर और जगन्नाथपुरी जैसी महत्वपूर्ण रचनाओं का निर्माण किया। सुदर्शन चक्र, शिव का त्रिशूल, पुष्पक विमान और इंद्र का वज्र भी उनसे जुड़ी प्रमुख रचनाओं में बताए जाते हैं।
ऐसे करें पूजा
सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा का संकल्प लें। इसके बाद मशीनों और औजारों की अच्छी तरह सफाई करें। भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित कर रोली, अक्षत, फूल और फल अर्पित करें। उपकरणों पर कलावा बांधकर मिठाई चढ़ाएं और आरती करें। पूजा के दौरान “ॐ विश्वकर्मणे नमः” मंत्र का जाप करें। अंत में प्रसाद सभी लोगों में वितरित करें। मान्यता है कि विश्वकर्मा पूजा से कार्यक्षेत्र में सकारात्मकता आती है और व्यापार व कामकाज में प्रगति का आशीर्वाद मिलता है।