अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना की घुसपैठ और भारतीय क्षेत्र पर कब्जे को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही खबरों का भारतीय सेना ने जोरदार खंडन किया है। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि चीनी सैनिकों ने भारतीय जवानों को पीछे हटाकर अरुणाचल प्रदेश में करीब 50 किलोमीटर अंदर तक कब्जा कर लिया है। हालांकि, भारतीय सेना ने इन दावों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है। सेना के फैक्ट चेक हैंडल ने स्पष्ट किया कि सीमा पर ऐसी कोई घटना नहीं हुई है और जानबूझकर गलत जानकारी फैलाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।
6 संदिग्ध अकाउंट्स के जरिए फैलाया गया दुष्प्रचार
भारतीय सेना के मुताबिक, 6 एक्स (X) अकाउंट्स की पहचान की गई है, जिन्होंने 6 नवंबर 2026 को दोपहर 3:06 बजे से 7 नवंबर की सुबह 1:46 बजे के बीच एक जैसी सामग्री पोस्ट की थी। इन अकाउंट्स में @SongWeilonzob1, @letmehandleyou1, @_Finding_sarah, @DarkReal09, @War_Updates5 और @sumit_sarkr शामिल हैं। सेना ने इन्हें संदिग्ध पाकिस्तान प्रायोजित अकाउंट्स बताया है। इन सभी पोस्ट में लगभग एक जैसी भाषा और समान वीडियो का इस्तेमाल किया गया था। वीडियो में जंगली और पथरीले इलाके में सैनिक दिखाई दे रहे थे। इनके जरिए चीनी सेना के आगे बढ़ने और भारतीय क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित करने का दावा किया जा रहा था। सेना ने इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी टैग किया है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे फर्जी दावे
सेना ने बताया कि भारत के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने के लिए पहले भी इसी तरह के तरीके अपनाए गए हैं। कई पुराने और असंबंधित वीडियो को गलत कैप्शन के साथ सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। एक मामले में कर्नाटक के देवनाहल्ली में आतंकवाद विरोधी मॉक ड्रिल के वीडियो को चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय जवानों की तलाशी लेने की घटना बताकर वायरल किया गया था।
इसी तरह कजाकिस्तान की स्पेशल फोर्सेज के अभ्यास को भारत-चीन संघर्ष का वीडियो बताया गया। लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया के नाम पर डिजिटल तरीके से बदला गया वीडियो भी प्रसारित किया गया, जिसमें अरुणाचल के कुछ हिस्सों पर चीन के नियंत्रण का दावा था। इसके अलावा सिक्किम के नाथू ला के पास वैध व्यापार केंद्र पर चीनी वाणिज्यिक वाहनों की आवाजाही को अवैध घुसपैठ बताया गया था। अरुणाचल प्रदेश में सियांग बांध परियोजना के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के वीडियो को भी सेना विरोधी विद्रोह के रूप में पेश किया गया।
भारतीय सेना ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील
सेना के अनुसार, ऐसे दुष्प्रचार अभियानों का उद्देश्य भारतीय सेना के प्रति लोगों का विश्वास कमजोर करना और सीमा की स्थिति को लेकर भ्रम पैदा करना है। संवेदनशील सीमा क्षेत्रों से जुड़ी गलत खबरें अनावश्यक तनाव भी पैदा कर सकती हैं। सेना ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली किसी भी खबर या वीडियो पर तुरंत विश्वास न करें। सीमा से जुड़े दावों को साझा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से उनकी पुष्टि जरूर करें। सेना का कहना है कि डिजिटल दौर में सूचना युद्ध भी राष्ट्रीय सुरक्षा की बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे में नागरिकों की जागरूकता बेहद जरूरी है। भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि 50 किलोमीटर तक चीनी कब्जे का दावा झूठा है और लोगों को इस तरह के भ्रामक प्रचार से बचना चाहिए।
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