हरियाणा के पंचकूला स्थित एक सरकारी स्कूल में छह साल की विशेष जरूरतों वाली बच्ची पर आठ वर्षीय छात्र के हमले के मामले में सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। शिक्षा विभाग ने दो शिक्षिकाओं को निलंबित कर दिया है, जबकि प्रधानाचार्य के खिलाफ कार्रवाई के लिए शिक्षा निदेशक को पत्र भेजा गया है। मामले की जांच के लिए शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने अलग-अलग कमेटियां बनाई हैं। गंभीर रूप से घायल बच्ची का पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज चल रहा है। सरकार ने उसके उपचार का पूरा खर्च उठाने का फैसला किया है।
जांच के लिए बनीं कमेटियां
28 अक्टूबर को हुई घटना के बाद शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा के निर्देश पर दो जांच कमेटियां गठित की गई हैं। शिक्षा विभाग की तीन सदस्यीय कमेटी को 24 घंटे में रिपोर्ट सौंपनी है, जबकि जिला प्रशासन की पांच सदस्यीय कमेटी सात दिन में अपनी रिपोर्ट देगी। जांच में स्कूल स्टाफ की जिम्मेदारी, बच्चों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित चूक की पड़ताल की जाएगी।
शिक्षा विभाग ने बच्ची की कक्षा इंचार्ज सिमरनजीत और आरोपी छात्र की कक्षा इंचार्ज पूजा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रधानाचार्य पर कार्रवाई के लिए शिक्षा निदेशक जितेंद्र दहिया को पत्र भेजा गया है। हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी स्वत: संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी किया है। आयोग ने स्कूल की निगरानी व्यवस्था, सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रोस्टर और घटना के बाद उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है।
CCTV में कैद हुई घटना
घटना का करीब सवा तीन मिनट का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। इसमें कथित तौर पर आठ वर्षीय छात्र बच्ची का सिर बेंच पर पटकता और लात-घूंसों से हमला करता दिखाई देता है। फुटेज में बाल पकड़कर घसीटने के अलावा ईंट और डस्टबिन से वार करने के दृश्य भी बताए जा रहे हैं।
परिजनों के मुताबिक, हमले के बाद बच्ची पहली मंजिल के एक कमरे में खून से लथपथ पड़ी रही। आरोप है कि स्कूल बंद करते समय चौकीदार ने कमरे की जांच नहीं की और बाहर से ताला लगाकर चला गया। बाद में बच्ची को लेने पहुंचे ऑटो चालक को वह नहीं मिली। तलाश करने पर कमरे में बाहर से ताला लगा मिला। कमरा खुलवाने पर बच्ची गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली। इस घटनाक्रम ने स्कूल में छुट्टी के समय बच्चों की सुरक्षा और कमरों की जांच की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बच्चा फ्री फायर खेलने का शौकीन
घटना के बाद पुलिस आरोपी छात्र के व्यवहार, पारिवारिक माहौल और दिनचर्या से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जानकारी के मुताबिक, बच्चा मोबाइल पर फ्री फायर गेम खेलता था, लेकिन परिजनों ने करीब डेढ़ महीने पहले उसे मोबाइल देना बंद कर दिया था। पुलिस उसकी मानसिक स्थिति का आकलन कराने के लिए मनोचिकित्सक की राय ले रही है। हालांकि, मोबाइल गेम खेलने और हमले के बीच किसी संबंध की अब तक पुष्टि नहीं हुई है। पड़ोसियों का कहना है कि बच्चा सामान्य व्यवहार करता था और गली में दूसरे बच्चों के साथ खेलता था। पुलिस स्कूल में उसके व्यवहार और घटना से पहले किसी बदलाव की भी जानकारी जुटा रही है।
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