प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत की सांस्कृतिक पहचान अब दुनिया के विभिन्न देशों में और मजबूत हो रही है। भारतीय संगीत, नृत्य, सिनेमा और खानपान के जरिए दूसरे देशों के लोग भारत की परंपराओं और जीवनशैली से जुड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने यह बात नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘बृहत्तर भारत: दुनिया भर में भारत के सांस्कृतिक संबंध’ के लिए भेजे गए अपने लिखित संदेश में कही। PM मोदी ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को देश की वैश्विक पहचान का महत्वपूर्ण आधार बताया। उनके संदेश में ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण, प्राचीन पांडुलिपियों को सहेजने और विदेशों में मौजूद भारतीय विरासत से जुड़ी वस्तुओं को वापस लाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया गया।
ज्ञान भारतम पहल से प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत को बचाने का काम केवल ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण तक सीमित नहीं है। भारत की प्राचीन पांडुलिपियां भी देश के ज्ञान, इतिहास और परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए सरकार ज्ञान भारतम पहल के तहत काम कर रही है। इस पहल का उद्देश्य पांडुलिपियों से जुड़ी विरासत को संरक्षित करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों तक भारत के प्राचीन ज्ञान और सांस्कृतिक परंपराओं को पहुंचाया जा सके। मोदी ने यह भी कहा कि विदेशों में मौजूद भारत की प्राचीन धरोहरों को वापस लाने के प्रयासों में तेजी आई है।
संगीत, नृत्य और सिनेमा से बढ़ रहे सांस्कृतिक संबंध
अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने भारतीय संस्कृति के उन पहलुओं का जिक्र किया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान को विस्तार दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगीत, नृत्य, सिनेमा और खानपान जैसे माध्यम विभिन्न देशों के लोगों को भारत से जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक विरासत और दुनिया की दूसरी सभ्यताओं व समाजों के साथ उसके ऐतिहासिक संबंधों पर विचार-विमर्श करना है। इस दौरान सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भारत की वैश्विक सांस्कृतिक उपस्थिति जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है।
विज्ञान भवन में तीन दिन तक चल रहा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में यह सम्मेलन 14 से 16 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के तहत आने वाला इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) कर रहा है। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री का लिखित संदेश केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने पढ़कर सुनाया। कार्यक्रम में भारत की सांस्कृतिक विरासत, उसके संरक्षण और दुनिया भर में भारतीय संस्कृति के प्रभाव से जुड़े विषयों पर चर्चा की जा रही है।
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