ईरान युद्ध से जुड़ी संवेदनशील जानकारी मीडिया तक पहुंचने के मामले में अमेरिकी प्रशासन(Donald Trump) ने जांच तेज कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन से जुड़े करीब 50 ज्वाइंट स्टाफ अधिकारियों और कर्मचारियों से पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि ईरान युद्ध के दौरान अमेरिकी हथियारों के भंडार और उनकी उपलब्धता से जुड़ी जानकारी पत्रकारों तक कैसे पहुंची।
युद्ध के दौरान अमेरिका के कुछ अहम हथियारों और मिसाइलों के तेजी से इस्तेमाल को लेकर अधिकारियों के बीच चिंता सामने आई थी। रिपोर्टों में बताया गया कि कुछ अत्याधुनिक हथियारों के भंडार पर दबाव बढ़ा और उन्हें दोबारा तैयार करने में काफी समय लग सकता है।
क्या होता है पॉलीग्राफ टेस्ट?
पॉलीग्राफ को आम तौर पर ‘लाई डिटेक्टर टेस्ट’ कहा जाता है। इस जांच में व्यक्ति से सवाल पूछते समय उसकी सांस, दिल की धड़कन और शरीर में होने वाले दूसरे शारीरिक बदलावों को रिकॉर्ड किया जाता है। इन प्रतिक्रियाओं के आधार पर यह समझने की कोशिश की जाती है कि सवालों का जवाब देते वक्त व्यक्ति किस तरह की शारीरिक प्रतिक्रिया दे रहा था। हालांकि, तनाव या घबराहट अपने आप में झूठ बोलने का पक्का सबूत नहीं माना जाता।
इसलिए पॉलीग्राफ को जांच में एक सहायक प्रक्रिया के तौर पर देखा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ज्वाइंट स्टाफ से जुड़े लोगों से यह जानने की कोशिश की गई कि क्या उन्होंने अमेरिकी हथियारों के घटते भंडार से संबंधित जानकारी किसी पत्रकार के साथ साझा की थी। यह जानकारी संवेदनशील मानी जाती है क्योंकि युद्ध के दौरान हथियारों की उपलब्धता सैन्य रणनीति और भविष्य की तैयारियों से जुड़ी होती है।
पेंटागन ने क्या कहा?
पेंटागन ने आंतरिक कर्मचारियों या चल रही जांच से जुड़ी विशेष जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार किया है। विभाग का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय सूचनाओं के लीक होने को गंभीरता से लिया जाता है और ऐसे मामलों की जांच की जाती है। फिलहाल जांच का अहम सवाल यही है कि ईरान युद्ध से जुड़ी संवेदनशील सैन्य जानकारी आखिर अमेरिकी व्यवस्था से बाहर कैसे पहुंची।