हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में तेजी से फैल रहे ड्रग नेटवर्क पर रोक लगाने के लिए बड़ा और सख्त फैसला लिया है। CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान घोषणा की कि भविष्य में सरकारी नौकरी पाने वाले युवाओं के लिए ‘चिट्टा टेस्ट’ जरूरी होगा। इसके अलावा मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य प्रोफेशनल कोर्स कर रहे छात्रों की भी हर साल ड्रग जांच कराई जाएगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने साफ कहा कि राज्य सरकार नशे के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति पर काम कर रही है।
ड्रग सेवन करने वाले छात्रों को भेजा जाएगा रिहैब सेंटर
CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि अगर किसी छात्र की जांच में नशीले पदार्थों के सेवन की पुष्टि होती है तो उसे रिहैबिलिटेशन सेंटर भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं का भविष्य बर्बाद नहीं होने देगी और नशे के खिलाफ हर स्तर पर सख्ती की जाएगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि पंचायत चुनाव के बाद 1 जून से 20 अगस्त तक राज्यभर के स्कूलों और कॉलेजों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसमें DC, SP, SDM, DSP समेत प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करेंगे।
123 सरकारी कर्मचारी चिट्टा तस्करी में शामिल
CM सुक्खू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि राज्य में अब तक 123 सरकारी कर्मचारी चिट्टा तस्करी या ड्रग नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं। इनमें पुलिस विभाग के 21 जवान भी शामिल हैं, जिन्हें नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है। इसके अलावा बिजली बोर्ड, शिक्षा विभाग, बैंकिंग, IPH, HPTC, फॉरेस्ट, PWD और अन्य विभागों के कर्मचारी भी जांच के दायरे में आए हैं।
224 पंचायतें रेड जोन घोषित
सरकार ने पहली बार पंचायत स्तर पर ड्रग नेटवर्क की पहचान कर रेड, येलो और ग्रीन जोन बनाए हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, अब तक करीब 12 हजार संदिग्ध ड्रग तस्करों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान की गई है।
प्रदेश की 224 पंचायतों को रेड जोन में रखा गया है, जहां पुलिस और CID की विशेष निगरानी जारी है। इनमें शिमला, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, बिलासपुर, बद्दी और सिरमौर के कई इलाके शामिल हैं।
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