उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी संयुक्त कार्रवाई को अंजाम देते हुए सहारनपुर और आसपास के क्षेत्रों से चार संदिग्धों को हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश एटीएस और एसटीएफ(UP ATS-STF) की संयुक्त टीम द्वारा 26 मई को की गई, जिसमें आरोपियों के खिलाफ गंभीर सुरक्षा संबंधी इनपुट मिलने के बाद कार्रवाई की गई।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पकड़े गए संदिग्ध कथित रूप से पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के संपर्क में थे। एजेंसियों के अनुसार, ये लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वीडियो कॉलिंग एप्स के जरिए लगातार बाहरी नेटवर्क से जुड़े हुए थे और वहीं से निर्देश प्राप्त कर रहे थे। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि इन संपर्कों का दायरा कितना व्यापक था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़ाव के आरोप
सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों पर यह भी आरोप है कि वे पाकिस्तान के कुख्यात गैंगस्टर शहजाद भट्टी के कथित नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। दावा किया जा रहा है कि यह एक संभावित स्लीपर सेल नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है जो भारत में रहकर गुप्त रूप से गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर रहा था।
एजेंसियां इस पहलू की भी गहराई से जांच कर रही हैं कि क्या यह केवल डिजिटल संपर्क तक सीमित था या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था। फिलहाल इस दावे की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी।
अलग-अलग जिलों से हुई गिरफ्तारी
गिरफ्तार आरोपियों में सहारनपुर के दो, मुजफ्फरनगर का एक और हरिद्वार का एक व्यक्ति शामिल बताया जा रहा है। इनके नाम महकाब, गगनदीप उर्फ गुरी सिंह, शाहरुख और मुशर्रफ बताए गए हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि ये सभी लंबे समय से निगरानी में थे और संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर इन्हें हिरासत में लिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में यह भी संकेत मिले हैं कि कुछ आरोपियों की मुलाकातें इस साल मार्च में नोएडा में हुई थीं। वहां कथित तौर पर योजना और संपर्क नेटवर्क को आगे बढ़ाने से जुड़ी बातचीत हुई थी। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
गुप्त जानकारी साझा करने का शक
एटीएस की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों पर यह भी संदेह है कि वे देश के संवेदनशील प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण स्थानों से जुड़ी जानकारी बाहरी हैंडलर्स तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या वे किसी बड़े नेटवर्क के लिए स्थानीय स्तर पर सपोर्ट सिस्टम तैयार कर रहे थे। फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके मोबाइल फोन, लैपटॉप तथा अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
एजेंसियां उनके कॉल रिकॉर्ड, चैट हिस्ट्री और सोशल मीडिया गतिविधियों का भी विश्लेषण कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क की कड़ी को जोड़ा जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यह एक प्रारंभिक जांच है और आने वाले दिनों में इस मामले में और अहम खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच में जुटी हुई हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।