पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के करीबी और उनके निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में जांच तेज हो गई है। पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) को इस केस में बड़ा सुराग एक UPI ट्रांजैक्शन से मिला, जिसके आधार पर उत्तर प्रदेश और बिहार से तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि हत्या की साजिश और वारदात को अंजाम देने में कम से कम आठ लोगों की भूमिका सामने आ रही है।
टोल प्लाजा पर डिजिटल पेमेंट बना सुराग
चंद्रनाथ रथ की 6 मई की रात उत्तरी 24 परगना जिले के मध्यमग्राम इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह भारतीय वायु सेना के पूर्व कर्मी भी रह चुके थे और वर्तमान में शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक के रूप में कार्यरत थे। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों के CCTV फुटेज, तकनीकी डेटा और डिजिटल गतिविधियों की जांच शुरू की। इसी दौरान निवेदिता सेतु स्थित बैली टोल प्लाजा पर किए गए एक UPI भुगतान ने जांच को नई दिशा दिया। पुलिस के अनुसार, फरार कार में मौजूद एक व्यक्ति ने टोल भुगतान डिजिटल माध्यम से किया था। इसी ट्रांजैक्शन के जरिए पुलिस को एक मोबाइल नंबर मिला, जिसने संदिग्धों तक पहुंचने में मदद की।
बिहार और UP से हुई गिरफ्तारी
SIT ने कार्रवाई करते हुए बिहार के बक्सर से मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य को हिरासत में लिया, जबकि उत्तर प्रदेश के अयोध्या से राज सिंह नामक व्यक्ति को पकड़ा गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, राज सिंह मूल रूप से बलिया का रहने वाला है और उस पर हत्या में इस्तेमाल किए गए लॉजिस्टिक नेटवर्क से जुड़े होने का शक है। जांच एजेंसियों को यह भी संदेह है कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक शार्पशूटर हो सकता है।
कई दिनों की रेकी के बाद हुआ हमला
पुलिस का दावा है कि यह हत्या पूरी योजना और रेकी के बाद अंजाम दी गई। जांच के मुताबिक, चंद्रनाथ रथ की SUV को मध्यमग्राम के दोहरिया इलाके में नकली नंबर प्लेट लगी एक कार ने रोका था। इसके बाद बाइक सवार हमलावरों ने बेहद करीब से गोलीबारी की। सूत्रों के अनुसार, वारदात में इस्तेमाल की गई सिल्वर रंग की हैचबैक कार झारखंड से लाई गई थी। पुलिस को शक है कि एक अंतरराज्यीय नेटवर्क ने रेकी, वाहन व्यवस्था और आरोपियों को छिपाने में मदद की थी।
नकली नंबर प्लेट वाले वाहन बरामद
पुलिस ने कोलकाता एयरपोर्ट और बारासात इलाके से वारदात में इस्तेमाल की गई संदिग्ध कार और दो मोटरसाइकिलें बरामद कर ली हैं। तीनों वाहनों पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई थीं। SIT अब बंगाल समेत कई राज्यों में छापेमारी कर बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल फुटप्रिंट, CCTV और तकनीकी सबूत इस केस की जांच में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
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