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IRGC ने खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों को अमेरिकी सैन्य ठिकानों से 500 मीटर दूर रहने की दी चेतावनी

एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों से कहा है कि वे अमेरिकी सैन्य ठिकानों से कम से कम 500 मीटर दूर रहें। उन्होंने चेतावनी दी है कि इलाके में बढ़ते तनाव के कारण ऐसी जगहों को निशाना बनाया जा सकता है।

यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब ईरान और अमेरिका के बीच टकराव बढ़ रहा है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हाल के हफ़्तों में 55 लोग मारे गए हैं और 600 से ज़्यादा घायल हुए हैं।

हाल के हफ़्तों में 55 लोग मारे गए हैं और 600 से ज़्यादा घायल

ईरान के सरकारी टेलीविज़न पर IRGC का एक बयान प्रसारित किया गया, जिसमें अमेरिकी सैन्य ठिकानों के पास रहने वाले लोगों से कहा गया कि वे बेस, रहने की जगहों और अमेरिकी कर्मियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली अन्य जगहों से कम से कम 500 मीटर दूर रहें। AP की रिपोर्ट के अनुसार, बयान में लोगों से अमेरिकी सैनिकों की लोकेशन की जानकारी IRGC को देने के लिए भी कहा गया।

यह चेतावनी अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के खिलाफ लगातार 13वीं रात हमले पूरे करने की घोषणा के कुछ घंटों बाद आई। AP के अनुसार, इसके तुरंत बाद उत्तरी इराक में अमेरिकी सेना वाले एक सैन्य अड्डे के पास धमाकों की खबर मिली, जबकि बहरीन में हवाई हमले के सायरन बजने से टकराव के और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई।

पिछले एक हफ़्ते में टकराव और तेज़ हो गया है। अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर बार-बार हमले किए हैं, जबकि तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाया है और पूरे इलाके में अमेरिकी संपत्तियों और सहयोगियों पर हमले किए हैं।

कच्चे तेल की कीमतें तेज़ी से बढ़ सकती

होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया भर में तेल की आपूर्ति के लिए एक अहम रास्ता है, इस टकराव के केंद्र में बना हुआ है। इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही में किसी भी तरह की रुकावट से कच्चे तेल की कीमतें तेज़ी से बढ़ सकती हैं और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में खलल पड़ सकता है।

AP की रिपोर्ट के अनुसार, आपूर्ति को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं क्योंकि ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने इस हफ़्ते लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया। उन्होंने खाड़ी के कच्चे तेल के निर्यात के वैकल्पिक रास्ते में रुकावट डालने की अपनी धमकी पर अमल किया। लगातार हो रहे नुकसान और बढ़ते आर्थिक असर के बावजूद, तत्काल किसी कूटनीतिक समाधान के आसार कम ही दिख रहे हैं।

 

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