Pakistan Donkey Export: पाकिस्तान को चीन के लिए गधों का एक नया बड़ा बाजार मिल गया है। बलूचिस्तान के ग्वादर में चीनी कंपनी Hangeng Group का स्लॉटरहाउस गधों के मांस और खाल को प्रोसेस कर चीन भेज रहा है। जुलाई 2026 में ग्वादर से गधे के मांस और खाल की पहली खेप चीन पहुंची थी
चीन को क्यों चाहिए इतने गधे?
चीन में गधे के मांस की मांग के साथ उनकी खाल की मांग भी काफी ज्यादा है। गधे की खाल को उबालकर उससे जिलेटिन तैयार किया जाता है, जिसका इस्तेमाल पारंपरिक चीनी दवा ईजियाओ बनाने में होता है। चीन में इसे ब्लड टॉनिक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है और इसके बारे में एनीमिया, इम्युनिटी, नींद और अन्य स्वास्थ्य लाभों से जुड़े दावे किए जाते हैं। ईजियाओ का इस्तेमाल कॉस्मेटिक्स में भी होता है।
चीन में घट गई गधों की संख्या
चीन में बड़े पैमाने पर गधों के वध और ईजियाओ की मांग बढ़ने से घरेलू सप्लाई पर दबाव पड़ा है। इसी कारण चीनी खरीदार अब दूसरे देशों से गधे और उनकी खाल मंगाने लगे हैं। पाकिस्तान के अलावा ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया भी चीन के लिए सप्लायर रहे हैं।
हर साल लाखों गधों का वध
अमेरिकी कांग्रेस की रिसर्च सर्विस यानी CRS की 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में हर साल करीब 23 से 48 लाख गधों को उनकी खाल के लिए काटा जाता है। रिपोर्ट के अनुसार ईजियाओ की बढ़ती मांग ने चीन की घरेलू गधों की सप्लाई को प्रभावित किया है और दूसरे देशों से खाल मंगाने का चलन बढ़ा है।
8 अरब डॉलर का बाजार
चीन में गधे से जुड़े उत्पादों का बाजार काफी बड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक चीन का ईजियाओ बाजार करीब 7.8 अरब डॉलर का था। वहीं गधे के मांस का इस्तेमाल चीन के कुछ हिस्सों में भोजन के तौर पर किया जाता है। 2021 में चीन ने करीब 9,201 टन गधे का मांस आयात किया था।
पाकिस्तान में करीब 60 लाख गधे
पाकिस्तान में गधों की आबादी करीब 60 लाख बताई जाती है। चीन की बढ़ती मांग ने पाकिस्तान के लिए इसे कमाई के नए स्रोत में बदल दिया है। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार गधे के मांस और खाल का एक्सपोर्ट आने वाले समय में देश के लिए विदेशी मुद्रा कमाने का जरिया बन सकता है।
ग्वादर में रोज 800 गधे काटने की तैयारी
बलूचिस्तान के ग्वादर में Hangeng Group अपने स्लॉटरहाउस की क्षमता बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। कंपनी आने वाले महीनों में रोजाना 800 गधों तक प्रोसेसिंग क्षमता ले जाने का लक्ष्य रखती है। कंपनी के मुताबिक इससे करीब 5 मिलियन डॉलर प्रति महीने की विदेशी मुद्रा कमाई हो सकती है, जो आगे चलकर 7 मिलियन डॉलर प्रति महीने तक पहुंचने का अनुमान है।
CPEC से जुड़ा है कारोबार
ग्वादर का यह प्रोजेक्ट चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी CPEC से जुड़े आर्थिक सहयोग के बड़े ढांचे का हिस्सा है। पाकिस्तान सरकार ने भी चीन के साथ गधे के मांस और खाल के एक्सपोर्ट के लिए नियम और सुविधाएं विकसित की हैं। 2025 में पाकिस्तानी सरकार ने ग्वादर में गधा फार्म, स्लॉटरहाउस और एक्सपोर्ट सुविधाएं विकसित करने की चीनी रुचि का स्वागत किया था।
अफ्रीका तक पहुंची चीन की तलाश
चीन की बढ़ती मांग का असर अफ्रीका पर भी पड़ रहा है। गधों की संख्या में गिरावट को लेकर वहां चिंता जताई गई है। CRS ने भी गधे की खाल के अंतरराष्ट्रीय कारोबार और विकासशील देशों में गधों की संख्या पर इसके प्रभाव को लेकर चिंताओं का उल्लेख किया है। अब चीन की मांग के कारण अफ्रीकी देशों में भी गधों की संख्या पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
धार्मिक वजह से पाकिस्तान में नहीं खाया जाता गधे का मांस
पाकिस्तान में मुस्लिम धार्मिक मान्यताओं के कारण गधे का मांस आम तौर पर नहीं खाया जाता, जबकि चीन के कुछ हिस्सों में इसे भोजन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसी अंतर ने पाकिस्तान से चीन को गधे के मांस और खाल के एक्सपोर्ट के लिए एक अलग कारोबारी बाजार तैयार किया है।
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