दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी(Sridevi) की पारिवारिक संपत्ति को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। चेन्नई स्थित करोड़ों की जमीन के इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी सहमति और बातचीत के जरिए विवाद को खत्म करने की सलाह दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले में मध्यस्थता के लिए किसी पूर्व हाई कोर्ट जज को नियुक्त करने की बात भी कही है।
यह पूरा मामला चेन्नई के शोलींगनलूर इलाके में ईस्ट कोस्ट रोड के पास स्थित लगभग 4.77 एकड़ जमीन से जुड़ा हुआ है। इस जमीन को साल 1988 में श्रीदेवी, उनकी मां और बहन ने मिलकर चार अलग-अलग सेल डीड के जरिए खरीदा था। साल 2018 में श्रीदेवी के निधन के बाद, 2023 में इस संपत्ति के राजस्व रिकॉर्ड में उनके पति बोनी कपूर और दोनों बेटियों-जाह्नवी कपूर और खुशी कपूर का नाम दर्ज कर लिया गया। फिलहाल इस ज़मीन पर कपूर परिवार का एक फार्महाउस बना हुआ है।
क्यों शुरू हुआ यह विवाद?
राजस्व रिकॉर्ड में नाम चढ़ने के बाद, एम.सी. शिवकामी और उनके परिवार ने चेंगलपट्टू की एक सिविल कोर्ट में इसके खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया। उनका दावा था कि 1943 में इस जमीन के असली मालिक एम.सी. संबंद मुदलियार थे और वे उन्हीं के वंशज हैं। उनका कहना था कि 1988 में की गई यह बिक्री अवैध है और इस संपत्ति पर उनका भी पांचवां हिस्सा यानी 1/5वां अधिकार बनता है।
मद्रास हाई कोर्ट में दी गई चुनौती
कपूर परिवार ने निचली अदालत के इस मुकदमे को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। इस साल मई में हाई कोर्ट ने बोनी कपूर के परिवार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के मुकदमे को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने माना कि करीब 40 साल पुरानी बिक्री को अब चुनौती देना कानूनी समय-सीमा के खिलाफ है और याचिकाकर्ताओं का दावा कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
इसके बाद याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए फिलहाल संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है और मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर तय की है। साथ ही, अदालत ने दोनों पक्षों को मध्यस्थता के जरिए मामले को शांतिपूर्वक हल करने का अनूठा सुझाव दिया है।