पाकिस्तान में प्रांतीय सरकारों के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान सोमवार को उस समय और तेज हो गई, जब खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने लाहौर में पुलिस अधिकारियों पर उन्हें अगवा करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि बाद में उन्हें बिना सुरक्षा के सड़क किनारे छोड़ दिया गया। पंजाब सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए घटना को अलग तरीके से पेश किया है।
पुलिस वाहन में जाने को लेकर सामने आईं दो बातें
रिपोर्ट के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अफरीदी हिरासत में लिए गए पीटीआई कार्यकर्ताओं को छुड़ाने की कोशिश के दौरान पुलिस वैन में बैठे थे। कुछ कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया गया, लेकिन बाकी के वाहन में रहने पर मुख्यमंत्री ने वैन से उतरने से इनकार कर दिया। अधिकारी का दावा है कि पुलिस वैन कुछ दूरी तक गई और बाद में अफरीदी को बाहर निकालकर सड़क किनारे छोड़ दिया गया। वहीं पंजाब की सूचना मंत्री आजमा बोखारी ने अपहरण या गिरफ्तारी से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ उनके गार्ड और कैमरामैन मौजूद थे, इसलिए इसे हिरासत में लिया जाना नहीं कहा जा सकता। अफरीदी के बाहरी दबाव में छोड़े जाने के दावे पर बोखारी ने तंज कसते हुए कहा कि इसमें एकमात्र दबाव उनका “लो ब्लड प्रेशर” था।
PTI ने बताया संघीय ढांचे पर हमला
घटना के बाद खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने पंजाब पर निर्वाचित मुख्यमंत्री को डराने के लिए पुलिस का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। पीटीआई ने भी घटना की निंदा करते हुए कहा कि इससे प्रांतों के बीच अविश्वास बढ़ सकता है और समर्थकों से शांतिपूर्ण प्रतिक्रिया की अपील की। पार्टी महासचिव सलमान अकरम राजा ने इस अपहरण को पाकिस्तान के संघीय ढांचे पर हमला बताया। अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने भी अफरीदी के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट किया था, हालांकि बाद में उन्होंने उसे हटा दिया।
मरियम नवाज से बढ़ा राजनीतिक टकराव
अफरीदी लाहौर एक राजनीतिक सभा में शामिल होने और पीटीआई के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता के परिवार से मिलने पहुंचे थे। उनकी यात्रा के दौरान पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज के साथ उनके मतभेद भी चर्चा में रहे। सितंबर के पहले सप्ताह में मरियम ने दूसरे प्रांतों की सरकारों से खतरा महसूस होने की बात कही थी, जिस पर अफरीदी ने जवाब दिया कि पंजाब के लोग उनके लिए खतरा नहीं हैं। उन्होंने 27 सितंबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की बात भी कही है। पूर्व सांसद मोहसिन दावर ने भी मरियम के बयान पर सवाल उठाया। दूसरी ओर, गृह मंत्री मोहसिन नकवी पाकिस्तान की प्रशासनिक व्यवस्था में पुनर्गठन और नए प्रांतों या प्रशासनिक क्षेत्रों की जरूरत पर बहस को आगे बढ़ा रहे हैं।
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