Vaibhav sooryavanshi Stand In Captain: भारतीय घरेलू क्रिकेट में रविवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसे रेड-बॉल क्रिकेट के इतिहास में बेहद मुश्किल माना जाएगा। बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी मैदान पर 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में अचानक ईस्ट जोन की कप्तानी संभाल ली। कुछ महीने पहले ही फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में कदम रखने वाले वैभव को नियमित कप्तान ईशान किशन के चोटिल होने के बाद यह जिम्मेदारी मिली।
19वें ओवर में चोटिल हुए ईशान किशन
सेंट्रल जोन के खिलाफ मुकाबले में ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया था। ईस्ट जोन के तेज गेंदबाज अभिजीत सरकार ने शुरुआत में टीम को दो सफलताएं दिलाईं। त्रिपुरा के इस गेंदबाज ने अमन मोखाड़े को 8 रन और कुणाल चंदेला को 6 रन पर आउट किया, जिससे सेंट्रल जोन का स्कोर 36 रन पर 2 विकेट हो गया था।
कलाई पर लगी गेंद और मैदान से बाहर हुए ईशान
मुकाबले के 19वें ओवर में विकेटकीपिंग कर रहे ईशान किशन की दाहिनी कलाई पर अचानक गेंद लग गई। दर्द बढ़ने पर फिजियो को मैदान पर बुलाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद भी जब उन्हें राहत नहीं मिली, तो ईशान को मैदान छोड़ना पड़ा। बाद में वह कलाई पर बैंडेज बांधे नजर आए। उनकी जगह झारखंड के कुमार कुशाग्र ने विकेटकीपिंग संभाली।
उप-कप्तान वैभव ने संभाली टीम की कमान
ईशान के मैदान से बाहर जाने के बाद कप्तानी की जिम्मेदारी 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को मिली। दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन के उप-कप्तान बनाए गए वैभव ने बिना झिझक फील्डिंग सजाने और गेंदबाजों को दिशा देने की जिम्मेदारी संभाली। इतनी कम उम्र में इतने बड़े घरेलू मुकाबले में कप्तानी करना उनके करियर का बेहद खास पल बन गया।
वैभव को उप-कप्तान बनाने पर हुआ था विवाद
वैभव को टूर्नामेंट के लिए उप-कप्तान बनाए जाने के समय चयनकर्ताओं के फैसले पर सवाल भी उठे थे। कई दिग्गजों का मानना था कि 15 साल के खिलाड़ी को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देना जल्दबाजी हो सकती है। हालांकि, ईस्ट जोन के चयनकर्ताओं ने अपने फैसले का बचाव किया था।
चयनकर्ता मनीष वर्धन ने बताया था भविष्य का प्लान
चयन समिति में शामिल झारखंड के पूर्व क्रिकेटर और चयनकर्ता मनीष वर्धन ने कहा था कि चयनकर्ता सिर्फ आज के बारे में नहीं सोच रहे हैं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य को ध्यान में रख रहे हैं। उनका मानना था कि वैभव में नेतृत्व करने की असाधारण क्षमता है और बड़े मंच पर उन्हें ग्रूम करना भारतीय क्रिकेट के हित में होगा। ईशान की गैरमौजूदगी में मिली कप्तानी ने इस फैसले को अहम बना दिया।
9 मैचों में 215 रन का रिकॉर्ड
साल 2024 की शुरुआत में रणजी ट्रॉफी के जरिए बेहद कम उम्र में फर्स्ट-क्लास डेब्यू करने वाले वैभव का अब तक का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। सेंट्रल जोन के खिलाफ यह मुकाबला उनके फर्स्ट-क्लास करियर का 10वां मैच है। इससे पहले 9 मैचों में उन्होंने 16.53 की औसत से 215 रन बनाए हैं, जिसमें एक अर्धशतक शामिल है। रेड-बॉल क्रिकेट में अभी उनका अनुभव सीमित है और आंकड़े बताते हैं कि उन्हें लंबी पारियां खेलने के लिए और परिपक्व होना होगा।
दलीप ट्रॉफी डेब्यू में बल्ला रहा था खामोश
नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ अपने दलीप ट्रॉफी डेब्यू की पहली पारी में आक्रामक बाएं हाथ के बल्लेबाज वैभव सिर्फ 8 रन बनाकर आउट हो गए थे। हालांकि, उन्होंने गेंदबाजी में इसकी भरपाई की। अपनी उपयोगी स्पिन गेंदबाजी से वैभव ने 2 अहम विकेट हासिल किए और टीम की एक पारी से मिली शानदार जीत में योगदान दिया।
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