Rajya Sabha MP Sukhendu Sekhar Ray Resign: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के भीतर नेताओं के इस्तीफों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में टीएमसी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी छोड़ने के साथ-साथ राज्यसभा सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले को पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
ममता बनर्जी के करीबी रहे हैं रॉय
सुखेंदु शेखर रॉय उन नेताओं में शामिल रहे हैं जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस के शुरुआती दौर से लेकर सत्ता तक के सफर में अहम भूमिका निभाई। वर्ष 2011 में पश्चिम बंगाल में टीएमसी की सरकार बनने के बाद से वह हर अहम राजनीतिक मोड़ पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ खड़े नजर आए। ऐसे नेता का पार्टी से अलग होना टीएमसी के भीतर बढ़ती नाराजगी की ओर इशारा करता है।
संसद पहुंचकर सौंपा इस्तीफा
जानकारी के अनुसार, सुखेंदु शेखर रॉय ने सोमवार सुबह संसद पहुंचकर अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनके इस्तीफे की खबर ऐसे समय में सामने आई है जब ममता बनर्जी विपक्षी गठबंधन INDIA की बैठक में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली में मौजूद हैं।
चुनावी हार के बाद बढ़ा असंतोष
विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद टीएमसी लगातार आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रही है। पार्टी के कई नेता संगठन और नेतृत्व को लेकर सवाल उठा चुके हैं। लगातार हो रहे इस्तीफों ने यह संकेत दिया है कि चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष गहरा गया है।
पार्टी के सामने संगठन बचाने की चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वरिष्ठ नेताओं के लगातार पार्टी छोड़ने से तृणमूल कांग्रेस के सामने संगठन को एकजुट बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। यदि यह सिलसिला जारी रहा तो पार्टी को भविष्य में और राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
विपक्षी राजनीति पर भी पड़ेगा असर
सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा केवल टीएमसी के लिए ही नहीं, बल्कि विपक्षी राजनीति के लिए भी अहम माना जा रहा है। ऐसे समय में जब विपक्षी दल एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, टीएमसी के भीतर उभरता असंतोष नई राजनीतिक हलचल बढ़ा रहा है।
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