आज के दौर में जहां लोग संपत्ति और जमीन के टुकड़ों के लिए अपनों से ही रिश्ते तोड़ लेते हैं वहीं पंजाब के फिरोजपुर जिले के सतियावाला गांव के सरपंच कुलदीप सिंह भुल्लर(Sarpanch Kuldeep Singh) ने एक ऐसी मिसाल पेश की है जो इंसानियत को झकझोर कर रख देती है। उन्होंने अपनी करीब 3 करोड़ रुपये की पूरी दौलत बेसहारों और जरूरतमंदों की सेवा के लिए दान करने का बड़ा फैसला किया है। उन्होंने अपनी वसीयत अमृतसर के प्रसिद्ध ‘पिंगलवाड़ा’ के नाम कर दी है।
शिक्षा और धार्मिक कार्यों के लिए अनूठी पहल
कुलदीप सिंह ने अपनी वसीयत में बैंक जमा राशि, एफडी, डिजिटल एसेट्स, गोल्ड बॉन्ड और जमीन-जायदाद का पूरा विवरण दिया है। उन्होंने समाज के उत्थान के लिए बहुत ही सोच-समझकर इसका बंटवारा किया है गांव के गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई में पैसों की कमी आड़े न आए इसके लिए उन्होंने 10 लाख रुपये की एफडी (Fixed Deposit) कराई है।
इससे मिलने वाले ब्याज का उपयोग बच्चों की शिक्षा में किया जाएगा। इसके साथ ही, गांव के गुरुद्वारा साहिब के नाम पर भी 10 लाख रुपये की एक अन्य एफडी जमा करवाने का प्रावधान किया गया है।
किस प्रेरणा से लिया यह बड़ा फैसला?
सरपंच कुलदीप सिंह ने यह संकल्प लिया था कि वे अपने जीवन के 60 वर्ष पूरे होने पर महान समाज सुधारक भगत पूरन सिंह की पुण्यतिथि (5 अगस्त) के दिन अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा मानवता की सेवा में सौंप देंगे। इस प्रेरणा के पीछे उनके जीवन की एक घटना जुड़ी है। वे एक बार गंभीर स्वास्थ्य समस्या से बाल-बाल बचे थे।
उस कठिन परिस्थिति से बाहर आने के बाद उन्होंने गहराई से विचार किया कि जरूरत से ज्यादा जमा पूंजी का असली हकदार समाज और वे बेसहारा लोग हैं जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। जमीनी हकीकत और स्वार्थ से परे हटकर लिया गया कुलदीप सिंह भुल्लर का यह कदम आज के समाज के लिए प्रेरणा का एक ऐसा दीप है, जो यह सिखाता है कि सच्ची दौलत अपनों की मदद करने और समाज को जोड़ने में ही निहित है।