डोनाल्ड ट्रंप(Donald Trump) के हालिया बयानों ने एक बार फिर अमेरिकी राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। ईरान के साथ चल रही ‘इस्लामाबाद शांति वार्ता’ के बीच ट्रंप का रुख अचानक बदला हुआ नजर आ रहा है। पहले जहां वे जल्द समझौते की बात कर रहे थे, वहीं अब उन्होंने साफ कर दिया है कि किसी भी डील को लेकर उन्हें कोई जल्दबाजी नहीं है और वे दबाव में आकर कोई कमजोर समझौता नहीं करेंगे।
अपने ताजा बयान में ट्रंप ने इतिहास का हवाला देते हुए प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के साथ-साथ वियतनाम युद्ध का जिक्र किया। उन्होंने तर्क दिया कि जब बड़े युद्ध कई वर्षों तक चलते रहे, तो ईरान जैसे जटिल मुद्दे पर कुछ ही हफ्तों में नतीजे की उम्मीद करना गलत है। उनके मुताबिक, सैन्य स्तर पर कार्रवाई तेज रही हो सकती है, लेकिन कूटनीतिक फैसले सोच-समझकर ही लिए जाने चाहिए।
डेमोक्रेट्स पर बोला तीखा हमला
ट्रंप ने विपक्षी डेमोक्रेट्स पर भी तीखा हमला बोला। ट्रंप ने विस्तार से जोर देते हुए कहा कि प्रथम विश्व युद्ध 4 साल चला था, दूसरा विश्व युद्ध 6 सालों में अपने नतीजे तक पहूंचा था और फिर देखा जाए तो वियतनाम युद्ध तो 19 साल तक खिंचा था। इन सबको देखते हुए डेमोक्रेट्स कैसे बोल सकते हैं कि मैंने 6 हफ्तों के भीतर ही ईरान को हराने का वादा किया था। 25वें संशोधन और उनकी मानसिक स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने आलोचकों को आड़े हाथों लिया और कहा कि उन पर किसी तरह का दबाव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वे ऐसे लोगों की बातों में नहीं आएंगे जो पहले ईरान के खतरे की बात करते थे और अब उनकी नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं।
रणनीति का नतीजा ठोस होगा
उन्होंने ‘फेक न्यूज’ का जिक्र करते हुए कहा कि समय उनके खिलाफ नहीं है, बल्कि अहम यह है कि दशकों पुराने इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकाला जाए। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि वे सही समय पर ही किसी समझौते पर पहुंचेंगे।
इसके साथ ही उन्होंने वेनेजुएला का उदाहरण देते हुए संकेत दिया कि ईरान को लेकर चल रही रणनीति का नतीजा भी ठोस होगा। ट्रंप ने अपनी सैन्य ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में सेना को मजबूत बनाया गया था और अब उसी क्षमता का इस्तेमाल जटिल अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने में किया जा रहा है।