HomeBreaking Newsरोशनी से जगमग व्हाइट हाउस, ऑस्ट्रेलिया में फूटेंगे पटाखे… भारत ही...

रोशनी से जगमग व्हाइट हाउस, ऑस्ट्रेलिया में फूटेंगे पटाखे… भारत ही नहीं, इन देशों में भी धूमधाम से मनाई जाती है दिवाली, होता है सार्वजनिक अवकाश

Diwali 2026: दीपावली का त्योहार अब वैश्विक पहचान बना चुका है। भारत के अलावा नेपाल और श्रीलंका में भी इसे बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसके अलावा म्यांमार, मलयेशिया, सिंगापुर, फिजी, गुयाना-ट्रिनीडाड, सूरीनाम और मॉरीशस में विक्रमी पंचांग के अनुसार सार्वजनिक अवकाश रहता है।

अमेरिका से ऑस्ट्रेलिया तक दिवाली की धूम

भारतीय दुनिया के लगभग सभी हिस्सों में रहते हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया और पेंसिल्वेनिया में दिवाली के दिन सार्वजनिक अवकाश होता है। वहीं कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में हिंदू समुदाय इस त्योहार को पूरे उत्साह के साथ मनाता है। कनाडा के टोरंटो के उपनगर ब्रैम्पटन और वैंकूवर के सरे में दिवाली और दशहरे के मेले आयोजित किए जाते हैं। लंदन में भी इस अवसर पर खास रौनक देखने को मिलती है।

साल 2003 से व्हाइट हाउस में सजावट

अमेरिका में दिवाली की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2003 से हर वर्ष दीपावली के अवसर पर व्हाइट हाउस को रोशनी से सजाने की परंपरा चली आ रही है। भारत में भी अलग-अलग राज्यों में इस त्योहार को मनाने की परंपराएं और धार्मिक मान्यताएं अलग हैं। कहीं इसे मां लक्ष्मी के आगमन का पर्व माना जाता है तो कहीं भगवान श्रीराम के लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, इसी दिन पांडव 12 वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास पूरा करके लौटे थे।

अलग-अलग राज्यों में अलग धार्मिक मान्यताएं

दक्षिण भारत में दीपावली को नरकासुर पर भगवान श्रीकृष्ण की विजय के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि द्वारिका नरेश श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ इसी दिन नरकासुर का वध किया था। तमिलनाडु में इसे बलि पड़वा भी कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने वामन अवतार में असुर राजा बलि से सब कुछ दान में ले लिया था।

गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में दीपावली से नए पंचांग की शुरुआत होती है। वहीं बंगाल और पूर्वी भारत में इस दिन काली पूजा की जाती है। जैन धर्म के अनुयायी मानते हैं कि दीपावली के दिन ही उनके 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी को निर्वाण प्राप्त हुआ था। आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती ने भी इसी दिन प्राण त्यागे थे।

धन-धान्य और समृद्धि का पर्व है दिवाली

भारत कृषि प्रधान देश रहा है और यहां त्योहारों का संबंध फसलों से भी रहा है। खरीफ की फसल सितंबर के मध्य तक तैयार होने लगती है। धान की कटाई के बाद किसानों के पास पैसा आता है, जिससे वे त्योहार पर खरीदारी कर पाते हैं। यही वजह है कि दिवाली को धन-धान्य का पर्व भी कहा जाता है। इस अवसर पर मां लक्ष्मी को लाई और खील अर्पित करने की परंपरा है। उड़द, मसूर और मूंग जैसी दलहन की फसलें भी इसी समय तैयार होती हैं।

दिवाली से चरम पर पहुंचता है बाजार

व्यापारियों के लिए नवरात्रि से कार्तिक पूर्णिमा तक का समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान बाजारों में छूट और विशेष ऑफर दिए जाते हैं। शादी-विवाह और नए कारोबार की शुरुआत के लिए भी यह समय शुभ माना जाता है। दिवाली के आसपास वाहन, कपड़े, गहने और घरेलू सामान की खरीदारी बढ़ जाती है। कृषि पैदावार से मिलने वाली आमदनी का असर बाजार पर भी दिखाई देता है। कर्मचारियों को मिलने वाला बोनस और वेतन वृद्धि भी इस खरीदारी को बढ़ावा देते हैं।

धनतेरस से भैया दूज तक चलता है पांच दिवसीय पर्व

दीपावली का उत्सव धनतेरस से शुरू होता है। इस दिन बर्तन, सोना और वाहन खरीदना शुभ माना जाता है। इसके अगले दिन छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। इस दिन घरों की सफाई की जाती है और दीपक जलाए जाते हैं।

तीसरे दिन मुख्य दीपावली मनाई जाती है। शाम को शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। उन्हें फल, फूल, मिठाई और खील का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी घर में आगमन करती हैं, इसलिए घर को दीपों और रोशनी से सजाया जाता है।

गोवर्धन पूजा और भाई दूज के साथ समापन

दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा या अन्नकूट मनाया जाता है। इसके बाद भाई दूज का त्योहार आता है। मान्यता है कि इस दिन यमराज ने अपनी बहन यमी से तिलक करवाया था। इसलिए बहनें भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं और भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं।

खुशियों के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी

दीपावली पर पटाखे जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिससे खासकर अस्थमा के मरीजों को परेशानी हो सकती है। वहीं जुआ खेलने की परंपरा भी कई परिवारों के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बन जाती है। ऐसे में त्योहार की खुशियों को बनाए रखने के लिए प्रदूषण और जुए से बचना जरूरी है। धनतेरस से भाई दूज तक चलने वाला यह पर्व धार्मिक आस्था, पारिवारिक रिश्तों, समृद्धि और व्यापारिक गतिविधियों का खास संगम है।

Read More:

ट्रंप की सुरक्षा में फिर सेंध ! व्हाइट हाउस के पास से वेनेजुएला का शख्स गिरफ्तार, हथियारों का जखीरा बरामद

Yogita Tyagi
Yogita Tyagihttps://mhone.in/
योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments