LPG Price Hike: दिवाली से पहले कारोबारियों को महंगाई का झटका लगा है। देश की राजधानी दिल्ली से लेकर कोलकाता, मुंबई और चेन्नई तक कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी हुई है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के आंकड़ों के अनुसार, चारों महानगरों में कमर्शियल गैस सिलेंडर 10 रुपये से लेकर 17 रुपये तक महंगा हुआ है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कोलकाता में दर्ज की गई है।
दिल्ली में 10 रुपये बढ़े दाम
आईओसीएल के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 10 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद यहां 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत बढ़कर 2820 रुपये हो गई है। दिवाली के सीजन में इसका असर होटल, रेस्तरां, मिठाई और खान-पान से जुड़े कारोबार पर पड़ सकता है।
कोलकाता में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
कोलकाता में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में सबसे ज्यादा 17 रुपये का इजाफा किया गया है। बढ़ोतरी के बाद यहां सिलेंडर की कीमत 2971 रुपये हो गई है। वहीं, मुंबई में कमर्शियल गैस सिलेंडर 10.50 रुपये महंगा हुआ है और इसकी कीमत बढ़कर 2775 रुपये हो गई है।
चेन्नई में भी बढ़ी कीमत
चेन्नई में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में 11.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद यहां इसकी कीमत 2994.50 रुपये हो गई है। यानी चारों महानगरों में सबसे ज्यादा कीमत चेन्नई में है, जबकि सबसे ज्यादा मासिक बढ़ोतरी कोलकाता में दर्ज हुई है।
अगस्त के बाद लगातार तीसरी बढ़ोतरी
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में यह लगातार तीसरे महीने की बढ़ोतरी है। आंकड़ों के अनुसार, अगस्त के बाद से दिल्ली में कमर्शियल गैस सिलेंडर 82 रुपये महंगा हो चुका है। इसी अवधि में कोलकाता में इसकी कीमत में 98.50 रुपये, मुंबई में 83.50 रुपये और चेन्नई में 88.50 रुपये का इजाफा हुआ है।
घरेलू गैस सिलेंडर के दाम स्थिर
कमर्शियल गैस सिलेंडर के विपरीत घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर 942 रुपये, कोलकाता में 968 रुपये, मुंबई में 941.50 रुपये और चेन्नई में 957.50 रुपये पर बना हुआ है।
जून में आखिरी बार बदले थे घरेलू गैस के दाम
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में आखिरी बार जून के महीने में बदलाव किया गया था। इसके बाद से घरेलू एलपीजी के दाम स्थिर हैं। हालांकि, कमर्शियल सिलेंडर की लगातार तीसरे महीने हुई बढ़ोतरी दिवाली के समय कारोबारियों की लागत बढ़ा सकती है। इसका असर आगे चलकर मिठाई, रेस्तरां और अन्य खान-पान से जुड़ी सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
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