NEET प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने देशभर में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR रद्द करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 20 जुलाई के प्रदर्शन को लेकर दर्ज मामले अब रद्द माने जाएंगे। हालांकि, अदालत ने गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले आरोपियों को इस राहत से बाहर रखा है। ऐसे मामलों में पुलिस को कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दी गई है।
केंद्र के आश्वासन के बाद आया फैसला
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि केंद्र और संबंधित राज्य सरकारें प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस लेने के लिए तैयार हैं। दिल्ली पुलिस के अलावा बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सरकारों की ओर से भी इस संबंध में याचिकाएं दाखिल की गई थीं। केंद्र सरकार ने यह भी आश्वासन दिया कि 20 जुलाई के प्रदर्शन को लेकर भविष्य में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।
गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वालों पर कार्रवाई जारी
सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले कुछ लोगों को राहत नहीं दी है। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल करीब 2,873 लोगों में से ऐसे आरोपियों के खिलाफ दर्ज FIR पर दिल्ली पुलिस को आगे की कार्रवाई की अनुमति दी गई है।
5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च वापस
सुप्रीम कोर्ट के फैसले और केंद्र सरकार के सकारात्मक रुख के बाद CJP ने दिल्ली में 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया है। संगठन के प्रवक्ता सौरभ दास ने कोर्ट और दोनों पक्षों के वकीलों का आभार जताया और उम्मीद जताई कि आदेश का समय पर पालन किया जाएगा।
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