तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं और सबसे ज्यादा निशाने पर बुजुर्ग नागरिक आ रहे हैं। साइबर ठग नए-नए तरीकों से सीनियर सिटीजन्स को अपने जाल में फंसाकर बैंक खातों से रकम उड़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी खतरे को देखते हुए अब कुछ बैंक शाखाओं ने सुरक्षा बढ़ाने के लिए Dual OTP System लागू करना शुरू कर दिया है।
साइबर सुरक्षा से जुड़े जागरूकता मंच Cyber Dost ने भी सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाएं और धमकी भरे कॉल्स के जरिए बुजुर्गों से ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कई बार अपराधी खुद को अधिकारी बताकर डर पैदा करते हैं और फिर पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं।
दो जगह भेजा जाता है OTP
ऐसे मामलों को रोकने के लिए शुरू किए गए Dual OTP System में किसी भी महत्वपूर्ण ट्रांजैक्शन के दौरान दो अलग-अलग ओटीपी भेजे जाते हैं। पहला ओटीपी सीधे खाताधारक के मोबाइल नंबर पर जाता है जबकि दूसरा परिवार के किसी भरोसेमंद सदस्य के नंबर पर भेजा जाता है।
इससे लेन-देन में सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जुड़ जाती है और संदिग्ध ट्रांजैक्शन को समय रहते रोका जा सकता है। इस व्यवस्था का एक बड़ा फायदा यह भी है कि परिवार के सदस्य को ट्रांजैक्शन अलर्ट मिलने से तुरंत निगरानी संभव हो जाती है। केवल एक ओटीपी के आधार पर भुगतान पूरा नहीं हो पाएगा, जिससे धोखाधड़ी की आशंका काफी कम हो जाती है।
कहां शुरु हो चुका ये सिस्टम ?
फिलहाल यह सुविधा फरीदाबाद, नूंह, गुरुग्राम और पलवल समेत कई जिलों की 50 से अधिक बैंक शाखाओं में शुरू की जा चुकी है। निजी बैंकों के साथ भी इसे लेकर बातचीत जारी है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार के लोगों को अपने घर के बुजुर्गों को समय-समय पर ऑनलाइन ठगी के तरीकों के बारे में जागरूक करते रहना चाहिए।
अनजान कॉल्स पर ओटीपी साझा करने या बिना पुष्टि के पैसे भेजने से हमेशा बचना चाहिए। अगर किसी भी तरह की साइबर ठगी होती है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।