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असम से दिल्ली बुलाकर अलवर भेजी गई महिला, डराकर कर जबरदस्ती कराया जा रहा था काम

अलवर के अरावली विहार थाना क्षेत्र स्थित यातायात पुलिस थाने में संचालित महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्र ने एक पीड़ित महिला को उसके पति से मिलाकर संवेदनशीलता और मानवता की मिसाल पेश की है। यह मामला उस समय सामने आया जब असम की रहने वाली एक महिला ने केंद्र पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई और मदद की गुहार लगाई।

पीड़िता के अनुसार, वह अपने पति के साथ असम से रोजगार की तलाश में निकली थी। दोनों को एक एजेंट ने दिल्ली में काम दिलाने का भरोसा देकर वहां बुलाया था। लेकिन दिल्ली(Delhi) पहुंचने के बाद दोनों को अलग कर दिया गया। महिला का आरोप है कि उसे बिना उसकी सहमति के दिल्ली से अलवर भेज दिया गया जबकि वह अपने पति से अलग नहीं होना चाहती थी। इस पूरी प्रक्रिया में प्लेसमेंट एजेंसी की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है।

अलवर में जबरन काम और डर का माहौल

अलवर पहुंचने के बाद महिला को एक निजी घर में घरेलू कामकाज के लिए रखा गया, जहां उससे जबरन झाड़ू-पोछा और अन्य काम करवाए जा रहे थे। पीड़िता ने बताया कि उसे लगातार डराया-धमकाया जाता था और चोरी के झूठे आरोप लगाकर जेल भेजने की धमकी दी जाती थी। इस डर के कारण वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो गई थी लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। लगातार उत्पीड़न से परेशान होकर महिला ने किसी तरह हिम्मत जुटाई और अलवर स्थित महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्र पहुंच गई।

वहां उसने अपनी पूरी आपबीती अधिकारियों और लीगल काउंसलर के सामने रखी। महिला की बात सुनने के बाद केंद्र की टीम ने तुरंत मामले को गंभीरता से लिया और कार्रवाई शुरू की। लीगल काउंसलर मोनू वर्मा के अनुसार, महिला 21 मई को डरी-सहमी हालत में केंद्र पहुंची थी। पूरी जानकारी लेने के बाद टीम ने उसके पति से संपर्क किया और उन्हें अलवर बुलाया गया। इसके बाद दोनों पति-पत्नी को एक साथ मिलाया गया और महिला को सुरक्षित तरीके से उसके पति के साथ असम वापस भेजने की व्यवस्था की गई।

एजेंट और सिस्टम पर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर ऐसे एजेंटों और प्लेसमेंट सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं जो गरीब और काम की तलाश में निकले लोगों को झांसा देकर गलत परिस्थितियों में धकेल देते हैं। हालांकि, इस मामले में महिला सुरक्षा केंद्र की त्वरित कार्रवाई से पीड़िता को राहत मिली और वह अपने परिवार से दोबारा मिल सकी।

मानवता की मिसाल बनी पहल

यह पूरा मामला न सिर्फ प्रशासनिक सतर्कता का उदाहरण है बल्कि यह भी दिखाता है कि समय पर मदद मिलने से किसी भी पीड़ित की जिंदगी को दोबारा सामान्य किया जा सकता है। महिला की सुरक्षित घर वापसी ने एक बार फिर साबित किया कि संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई से मुश्किल हालात को बदला जा सकता है।

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