उत्तर प्रदेश में इस समय पड़ रही भीषण गर्मी और लू ने जनजीवन के साथ-साथ पशुओं की सेहत पर भी गंभीर असर डाला है। मुरादाबाद और बरेली जैसे जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है जिससे हालात बेहद कठिन हो गए हैं। तपती धूप और लू के चलते न केवल इंसान परेशान हैं बल्कि कुर्बानी के लिए तैयार किए गए बकरे भी तेजी से बीमार पड़ने लगे हैं।
बकरीद(Bakrid) के मद्देनजर पशुपालकों ने महीनों की मेहनत से बकरे तैयार किए थे लेकिन अचानक बढ़ी गर्मी ने उनकी सेहत बिगाड़ दी है। कई बकरों में डिहाइड्रेशन, तेज बुखार, कमजोरी और हीट स्ट्रोक जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं। स्थिति यह है कि कई जानवरों को गंभीर हालत में पशु अस्पतालों में लाना पड़ रहा है जहां उन्हें ग्लूकोज ड्रिप और प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है ताकि उनकी जान बचाई जा सके।
अस्पतालों में बढ़ी भीड़, रोजाना आ रहे सैकड़ों केस
मुरादाबाद के पशु चिकित्सालयों में हालात काफी चिंताजनक हैं। डॉक्टरों के अनुसार रोजाना 15 से 20 गंभीर मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें अधिकतर बकरे गर्मी और लू की चपेट में हैं। कई मामलों में बकरों को सर्दी-जुकाम, निमोनिया और तेज बुखार जैसी समस्याएं भी हो रही हैं।
वहीं बरेली जिले में स्थिति और भी गंभीर है जहां 34 सरकारी पशु चिकित्सालयों में रोजाना लगभग 350 बकरों का इलाज किया जा रहा है। यहां सबसे ज्यादा शिकायतें कमजोरी, पेट दर्द, दस्त और बुखार की आ रही हैं।
अलर्ट मोड पर पशुपालन विभाग
बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। विभाग की ओर से सभी अस्पतालों में दवाओं और इलेक्ट्रोलाइट थेरेपी की पर्याप्त व्यवस्था की गई है ताकि समय पर इलाज मिल सके।
इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में विशेष जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है, जिसमें पशुपालकों को गर्मी से बचाव के तरीके बताए जा रहे हैं जैसे समय-समय पर पानी पिलाना और जानवरों को धूप से दूर रखना।
विशेष टीमें गठित
पशुपालन विभाग ने स्थिति को संभालने के लिए विशेष टीमें गठित की हैं। साथ ही टोल-फ्री नंबर 1962 पर चलने वाली मोबाइल पशु एम्बुलेंस सेवा को भी सक्रिय किया गया है, जिसके जरिए बीमार जानवरों को घर पर ही प्राथमिक इलाज दिया जा रहा है। यह सुविधा उन पशुपालकों के लिए राहत बनकर आई है, जो दूर-दराज के इलाकों में रहते हैं और समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते।
बकरीद नजदीक होने के कारण पशुपालकों की चिंता और भी बढ़ गई है। जिन बकरों को कुर्बानी के लिए महीनों से तैयार किया गया था उनकी अचानक बिगड़ती सेहत ने आर्थिक नुकसान का खतरा पैदा कर दिया है। इलाज और देखभाल पर अतिरिक्त खर्च भी पशुपालकों के लिए बोझ बन रहा है।