Iran-US Tensions: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच एक नई कूटनीतिक पहल सामने आई है। दो महीने से जारी टकराव के बीच ईरान ने प्रस्ताव दिया है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए तैयार है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, ईरान ने इस प्रस्ताव के साथ एक अहम शर्त भी जोड़ी है कि परमाणु मुद्दे पर बातचीत बाद में की जाएगी।
परमाणु मुद्दे पर ईरान ने रखी शर्त
ईरान का कहना है कि पहले समुद्री संकट को पूरी तरह समाप्त किया जाए और अमेरिकी नाकाबंदी हटाई जाए, उसके बाद ही परमाणु मुद्दे पर बातचीत शुरू की जा सकती है। इस रुख को विशेषज्ञ एक ‘सामरिक बदलाव’ के रूप में देख रहे हैं, जहां ईरान तत्काल आर्थिक राहत को प्राथमिकता देता नजर आ रहा है, जबकि संवेदनशील परमाणु मुद्दे को फिलहाल टाल रहा है।
पाकिस्तान के जरिए रखा गया प्रस्ताव
इस प्रस्ताव को सीधे अमेरिका तक नहीं भेजा गया, बल्कि पाकिस्तान के जरिए पहुंचाया गया है। इसके अलावा मिस्र, तुर्की और कतर भी इस कूटनीतिक प्रक्रिया में शामिल बताए जा रहे हैं। पाकिस्तानी मध्यस्थों ने इस प्रस्ताव को व्हाइट हाउस तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।
ईरानी लीडरशिप में टकराव?
ईरान के इस प्रस्ताव के पीछे उसकी आंतरिक राजनीति भी एक बड़ा कारण मानी जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के भीतर परमाणु पर एकमत नहीं है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिए हैं कि यूरेनियम संवर्धन की सीमा और भंडार को लेकर नेताओं के बीच मतभेद हैं। यही वजह है कि ईरान फिलहाल इस मुद्दे को टालकर आर्थिक दबाव कम करना चाहता है। ईरान ने अपने प्रस्ताव में सीजफायर को लंबा करने या उसे स्थायी रूप देने की भी बात कही है। यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, हालांकि इसके पीछे ईरान की रणनीतिक जरूरतें भी साफ दिखाई देती हैं।
अमेरिका की बढ़ी चिंता
ईरान के इस प्रस्ताव ने वॉशिंगटन की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी अधिकारियों को डर है कि यदि पहले नाकाबंदी हटा ली गई, तो ईरान पर परमाणु मांगों को सीमित करने का दबाव कम हो जाएगा। अमेरिका चाहता है कि ईरान लंबे समय तक यूरेनियम संवर्धन को निलंबित रखे, ताकि परमाणु हथियारों की आशंका को रोका जा सके। अब सबकी नजरें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले कदम पर टिकी हैं। संभावना है कि ट्रंप अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक करेंगे, जिसमें इस प्रस्ताव और आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। इससे पहले ट्रंप संकेत दे चुके हैं कि जब तक ठोस समझौता नहीं होता, तब तक होर्मुज क्षेत्र में नौसैनिक नाकाबंदी जारी रह सकती है।
तेल निर्यात पर मंडराया खतरा
ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि नाकाबंदी जारी रही, तो ईरान का तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचेगा। यही कारण है कि ईरान अब कूटनीतिक रास्तों के जरिए राहत पाने की कोशिश कर रहा है।
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