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राखी के पीछे छिपा है इतिहास का बड़ा सच! जानिए रक्षाबंधन से जुड़ी 7 अनसुनी कहानियां

भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन(Raksha Bandhan) का पावन पर्व इस बार बेहद खास होने वाला है। इस साल 2026 में इस पवित्र त्योहार पर भद्रा की कोई भी साया नहीं रहेगा जिससे पूरे दिन बिना किसी रुकावट के राखी बांधी जा सकेगी। अगर सबसे उत्तम समय की बात करें, तो सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक का मुहूर्त राखी बांधने के लिए सबसे श्रेष्ठ है।

अगर आप सुबह किसी वजह से इस समय का इस्तेमाल न कर सकें तो परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है दोपहर 11:56 से 12:48 बजे तक का अभिजीत मुहूर्त भी आपके लिए बिल्कुल खुला रहेगा। इस दौरान आप अपनी बहन के हाथों से राखी बंधवाकर उनकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना कर सकते हैं और भाई उनकी आजीवन रक्षा का वचन निभाते हैं।

यमराज और यमुना की पौराणिक कथा

रक्षाबंधन से जुड़ी कई मान्यताएं और कथाएं हैं। एक पौराणिक कथा कहती है कि, मृत्यु के देवता यमराज और यमुना भाई-बहन थे। जब यमुना ने अपने भाई को रक्षासूत्र बांधकर उनकी लंबी आयु की कामना की तभी से हर साल श्रावण पूर्णिमा पर यह परंपरा चली आ रही है।

देवराज इंद्र और महाभारत काल से जुड़े प्रसंग

एक अन्य कथा के मुताबिक, देवताओं और दानवों के युद्ध में जब इंद्र हारने लगे थे तब उनकी पत्नी शची ने गुरु बृहस्पति के कहने पर उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था जिससे उन्हें विजय मिली। वहीं महाभारत काल में भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को युद्ध में विजय के लिए रक्षा सूत्र बांधने की सलाह दी थी। इसके अलावा, द्रोपदी द्वारा कृष्ण को और कुंती द्वारा अपने पौत्र अभिमन्यु को राखी बांधने का जिक्र भी मिलता है।

इतिहास के पन्नों से जुड़ी प्रसिद्ध कहानियां

राखी का त्योहार कई ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं से जुड़ा है। एक मान्यता के मुताबिक, सिकंदर की पत्नी ने राजा पुरु को राखी बांधकर भाई बनाया था। युद्ध में पुरु ने बहन को दिए वचन का सम्मान करते हुए सिकंदर की जान बख्श दी। इसी तरह, मेवाड़ की रानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी भेजकर सहायता मांगी थी और हुमायूं ने उनकी मदद करने का प्रयास किया। पौराणिक कथा में देवी लक्ष्मी ने राजा बाली को राखी बांधकर भाई बनाया और उनसे भगवान विष्णु को मुक्त करने का अनुरोध किया। इन कथाओं में राखी को प्रेम, विश्वास और भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक माना गया है।

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