बिहार पुलिस की साइबर अपराध और सुरक्षा इकाई (CCSU) साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल खातों के खिलाफ ‘साइबर प्रहार 3.0’ अभियान चला रही है। इस अभियान के तहत अब तक 5,035 संदिग्ध म्यूल खातों की पहचान की गई है। जांच में सामने आया है कि इन खातों के माध्यम से करीब 63 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी की गई।
कई राज्यों तक पहुंची जांच
CCSU की जांच के दौरान म्यूल खातों से जुड़े मामलों में 21 FIR दर्ज की गई हैं। हाल ही में पटना और झारखंड के देवघर से म्यूल खाते खोलने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा नवादा जिले के वारिसलीगंज में भी कार्रवाई की गई है। पुलिस आरोपियों तक पहुंचने के लिए CCTV फुटेज और अन्य तकनीकी सबूतों की मदद ले रही है।
जांच के दायरे में 22 बैंक के ब्रांच
जांच में पता चला है कि 5,035 संदिग्ध खातों में से 3,113 से अधिक खाते सिर्फ 22 बैंक शाखाओं में खोले गए थे। इसके बाद पुलिस ने संबंधित बैंक शाखाओं और वहां के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में संदिग्ध खाते बिना लापरवाही या संभावित मिलीभगत के खुलना संभव नहीं है।
फर्जी दस्तावेज और सिम नेटवर्क पर भी कार्रवाई
अभियान के दौरान पुलिस ने मोबाइल नंबरों के जरिए निजी जानकारी जुटाने वाले नेटवर्क के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज कर पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, फर्जी आधार, पैन और अन्य पहचान पत्र बनाने वाले नेटवर्क से जुड़े 815 संदिग्धों की पहचान की गई है। इस मामले में अब तक 41 FIR दर्ज की गई हैं और 67 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। इसके अलावा 11 बायोमीट्रिक स्कैनर, सात आइरिस स्कैनर, सिलिकॉन फिंगरप्रिंट समेत कई उपकरण जब्त किए गए हैं।
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