अब सोने-चांदी की तरह कोयले में भी निवेशक निवेश कर पाएंगे। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (MCX) को सेबी से मंजूरी मिल गई है। विषेशज्ञ इसे MCX के लिए ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं। इस मंजूरी के बाद MCX अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी स्थापित कर सकेगा, जिसका संभावित नाम MCX Coal Exchange Limited हो सकता है।
100 करोड़ रुपये तक शुरुआती निवेश
कंपनी के अनुसार, ड्राफ्ट कोल एक्सचेंज फ्रेमवर्क के तहत न्यूनतम नेटवर्थ की शर्तों को पूरा करने के लिए MCX शुरुआती तौर पर 100 करोड़ रुपये तक निवेश करेगा। शुरुआत में इस नई कंपनी में MCX की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। हालांकि भविष्य में रणनीतिक साझेदारों को भी शामिल किया जा सकता है।
SEBI ने दी मंजूरी
MCX ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि SEBI ने 17 अप्रैल 2026 के पत्र के जरिए SECC नियमों के तहत प्रस्तावित कोल एक्सचेंज कंपनी में निवेश की मंजूरी प्रदान की है। कंपनी ने कहा कि जैसे ही सरकार द्वारा अंतिम फ्रेमवर्क जारी होगा, उसके बाद भारत के कोल कंट्रोलर संगठन के पास लाइसेंस के लिए आवेदन किया जाएगा।
कोल एक्सचेंज को क्या होगा फायदा?
MCX के मुताबिक, इस प्लेटफॉर्म का मुख्य उद्देश्य कोयले की पारदर्शी, मानकीकृत और डिजिटल ट्रेडिंग को बढ़ावा देना है। यहां फिजिकल डिलीवरी के साथ कारोबार किया जा सकेगा। इससे कोयला सेक्टर में मूल्य निर्धारण बेहतर होगा, बाजार में पारदर्शिता आएगी। कंपनी का मानना है कि यह पहल भारत सरकार के पारदर्शी और तकनीक आधारित कोयला इकोसिस्टम के विजन के अनुरूप है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोल एक्सचेंज शुरू होने से भारत में कोयले की खरीद-बिक्री अधिक पारदर्शी होगी। इससे उद्योगों, बिजली कंपनियों और उपभोक्ताओं को भी फायदा मिल सकता है।
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