Shri Jagannath Rath Yatra 2026: विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथयात्रा गुरुवार को पारंपरिक वैभव और धार्मिक उल्लास के साथ शुरू होगी। श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने रथयात्रा का पूरा अनुष्ठान कार्यक्रम जारी कर दिया है। तय कार्यक्रम के अनुसार महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पारंपरिक ‘पहंडी’ सुबह 9:30 बजे शुरू होकर दोपहर 12:30 बजे तक चलेगी, जबकि तीनों रथों को खींचने की प्रक्रिया शाम 4 बजे से आरंभ होगी।
पुरी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ की तैयारी
रथयात्रा को लेकर पुरी पूरी तरह तैयार है। प्रशासन का अनुमान है कि इस वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु महाप्रभु के दर्शन के लिए पुरी पहुंचेंगे। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य सेवाओं और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। दिन की शुरुआत सुबह 6 बजे मंगल आरती से होगी।
सुबह से शुरू होंगे पारंपरिक अनुष्ठान
मंगल आरती के बाद मैलम, तड़प लागी, रोष होम, अबकाश, सूर्य पूजा और द्वारपाल पूजा सहित सभी पारंपरिक नीतियां निर्धारित समय पर पूरी होंगी। सुबह 8 से 9 बजे के बीच गोपाल बल्लव एवं सकाल धूप (खिचड़ी भोग) अर्पित किया जाएगा, जबकि सुबह 9 बजे रथ प्रतिष्ठा होगी। इसके बाद ‘पहंडी’ अनुष्ठान में महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को गर्भगृह से भव्य शोभायात्रा के साथ उनके-अपने रथों तक लाया जाएगा।
‘छेरा पहनरा’ का विशेष महत्व
‘पहंडी’ को रथयात्रा का सबसे आकर्षक और भावनात्मक अनुष्ठान माना जाता है। इसके बाद मदनमोहन बीजे, चितालागी और बेसा शेष जैसी नीतियां पूरी होंगी। दोपहर 2 से 3 बजे तक ‘छेरा पहनरा’ अनुष्ठान होगा, जिसमें पुरी के गजपति महाराजा सोने की झाड़ू से तीनों रथों की प्रतीकात्मक सफाई करेंगे। यह परंपरा इस संदेश का प्रतीक है कि महाप्रभु के समक्ष राजा और प्रजा सभी समान हैं।
शाम 4 बजे शुरू होगी रथयात्रा
चारा फिता और घोड़ा-सारथी लागी की रस्में पूरी होने के बाद शाम 4 बजे श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक तीनों रथों की यात्रा शुरू होगी। महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने-अपने रथों पर विराजमान होकर भक्तों के बीच नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे।
सुरक्षा के किए गए व्यापक इंतजाम
रथयात्रा को लेकर राज्य सरकार, श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन और पुरी जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से व्यापक तैयारियां की हैं। पूरे रथमार्ग पर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, एआई आधारित निगरानी, ड्रोन कैमरे, सीसीटीवी, यातायात नियंत्रण, चिकित्सा शिविर, आपातकालीन सेवाएं और भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन मिल सके।
दिनभर का रहेगा यह कार्यक्रम
रथयात्रा के कार्यक्रम के अनुसार सुबह 6:00 बजे मंगल आरती होगी। सुबह 9:00 बजे रथ प्रतिष्ठा संपन्न होगी। सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक ‘पहंडी’ अनुष्ठान चलेगा। दोपहर 2:00 बजे से 3:00 बजे तक ‘छेरा पहनरा’ की परंपरा निभाई जाएगी। इसके बाद शाम 4:00 बजे तीनों रथों को श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर के लिए खींचा जाएगा। आस्था, परंपरा और संस्कृति के इस महापर्व पर एक बार फिर पुरी ‘श्रीक्षेत्र’ से विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनने जा रही है, जहां महाप्रभु स्वयं भक्तों के बीच नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे।
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