केंद्र सरकार ने भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0’ के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है।
घरेलू चिप निर्माण पर रहेगा फोकस
अश्विनी वैष्णव के अनुसार, ISM 2.0 का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा देना, घरेलू चिप उत्पादन बढ़ाना, वैश्विक निवेश आकर्षित करना और आयात पर निर्भरता कम करना है। मिशन की अवधि बढ़ाने से चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन और पैकेजिंग सेक्टर में निवेश करने वाली कंपनियों को लंबे समय तक नीति संबंधी स्थिरता मिलेगी। नई योजना का फोकस पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन पर रहेगा। इसके तहत चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग के साथ-साथ सेमीकंडक्टर उपकरण, कच्चे माल और घरेलू बौद्धिक संपदा (IP) के विकास को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
ISM 1.0 में 12 परियोजनाओं को मिली थी मंजूरी
सरकार ने बताया कि ISM के पहले चरण के तहत 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी, जिनमें लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव था। इनमें एक सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट, दो कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट और नौ पैकेजिंग सुविधाएं शामिल थीं।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, ISM 2.0 की समय-सीमा 12 वर्ष करने का लक्ष्य वैश्विक और घरेलू निवेशकों का भरोसा बढ़ाना है, ताकि भारत वैश्विक चिप सप्लाई चेन में अपनी स्थिति और मजबूत कर सके।
यूरिया सेक्टर पर भी लिए अहम फैसले
मोदी कैबिनेट ने सेमीकंडक्टर मिशन के अलावा 62,500 करोड़ रुपये की नई मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को भी मंजूरी दी है। इसके साथ ही यूरिया क्षेत्र के लिए नई निवेश नीति को स्वीकृति दी गई और वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए यूरिया सब्सिडी जारी रखने का भी फैसला किया गया। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से घरेलू यूरिया उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और किसानों को चालू वित्त वर्ष के दौरान सब्सिडी वाली दरों पर खाद उपलब्ध होती रहेगी।
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