Ahmedabad Blast Case: 56 मौतें, 200 से ज्यादा घायल और 18 साल का दर्द… अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने 38 दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा और 11 दूसरे दोषियों की उम्रकैद की सजा को कायम रखा है। इसके साथ ही दोषियों की ओर से दायर सभी अपीलों को खारिज कर दिया गया। अदालत ने विस्फोटों में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
विशेष पीठ ने सुनाया अहम फैसला
यह फैसला गुजरात हाईकोर्ट की विशेष पीठ ने सुनाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए इस केस की सुनवाई के लिए विशेष बेंच का गठन किया गया था। मार्च 2025 से इस मामले की नियमित सुनवाई चल रही थी। राज्य सरकार की ओर से फांसी की सजा की पुष्टि के लिए दायर याचिका और दोषियों द्वारा सजा के खिलाफ दाखिल अपीलों पर संयुक्त सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।
2022 में विशेष अदालत ने सुनाई थी सजा
इससे पहले 18 फरवरी 2022 को अहमदाबाद की विशेष अदालत ने इस बहुचर्चित मामले में 38 दोषियों को फांसी और 11 अन्य दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। भारतीय कानून के तहत किसी भी निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा तब तक लागू नहीं की जा सकती, जब तक संबंधित हाईकोर्ट उसकी पुष्टि न कर दे। इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत यह मामला गुजरात हाईकोर्ट में विचाराधीन था।
2008 के धमाकों ने दहला दिया था देश
26 जुलाई 2008 को गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में कुछ ही मिनटों के अंतराल पर शहर के अलग-अलग इलाकों में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। बाजारों, बसों और भीड़भाड़ वाले स्थानों को निशाना बनाकर किए गए इन विस्फोटों में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस आतंकी हमले को जांच एजेंसियों ने देश के सबसे बड़े आतंकवादी हमलों में से एक माना था।

लंबी जांच के बाद 49 आरोपी हुए थे दोषी करार
विस्फोटों की जांच और लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद विशेष अदालत ने कुल 49 आरोपियों को दोषी ठहराया था। इसके बाद दोषियों ने अपनी सजा को चुनौती देते हुए गुजरात हाईकोर्ट में अपील दायर की, जबकि राज्य सरकार ने फांसी की सजा की पुष्टि के लिए अलग से याचिका दाखिल की थी।
सुप्रीम कोर्ट जाने का ऑप्शन अब भी खुला
दोनों पक्षों की दलीलों पर सुनवाई के बाद गुजरात हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए सभी अपीलों को खारिज कर दिया। इसके साथ ही 38 दोषियों की फांसी की सजा को न्यायिक मंजूरी मिल गई है, जबकि 11 दोषियों की उम्रकैद भी बरकरार रहेगी। हालांकि, कानून के तहत दोषियों के पास अब भी इस फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का ऑप्शन मौजूद है।
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