RBI Loan Recovery Rules: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोन रिकवरी प्रोसेस को लेकर नए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है। इन प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य लोन लेने वाले लोगों की सुरक्षा बढ़ाना, रिकवरी प्रोसेस को आसान करना और रिकवरी एजेंट्स जो बदसलूकी या दबाव डालकर लोन निकलवाने की कोशिश करते हैं उन घटनाओं पर रोक लगाना है। आरबीआई का यह नया फ्रेमवर्क अंतिम मंजूरी मिलने के बाद 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने की आशंका है।
किन बैंकों पर लागू होंगे नियम
आरबीआई के अनुसार ये नियम मुख्य रूप से कॉमर्शियल बैंकों पर लागू होंगे। हालांकि स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट्स बैंक, रीजनल रूरल बैंक और लोकल एरिया बैंक को इस दायरे से बाहर रखा गया है। नए नियमों के जरिए अब तक जारी अलग-अलग गाइडलाइंस की जगह एक समान फ्रेमवर्क लागू किया जाएगा।
रिकवरी एजेंसी और एजेंट की नई परिभाषा
ड्राफ्ट में पहली बार रिकवरी एजेंसी और रिकवरी एजेंट की साफ परिभाषा दी गई है। कोई भी आउटसोर्स कंपनी या व्यक्ति जो लोन वसूली का काम करता है, उसे रिकवरी एजेंसी माना जाएगा। वहीं जो लोग सीधे ग्राहकों से संपर्क करेंगे, वे रिकवरी एजेंट कहलाएंगे। आरबीआई ने साफ किया है कि बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स (BC) अगर रिकवरी प्रक्रिया में शामिल हैं तो उन पर भी यही नियम लागू होंगे।
बैंकों की जवाबदेही होगी तय
नए नियमों के तहत बैंकों को सही से रिकवरी पॉलिसी तैयार करनी होगी। इसमें शिकायत समाधान और एसकेलेशन सिस्टम, रिकवरी एजेंसियों की ड्यू डिलिजेंस, एजेंट्स की निगरानी और गलत रिकवरी के मामलों में उधार लेने वालों को मुआवजा देने जैसे प्रावधान शामिल होंगे। इसके अलावा रिकवरी एजेंट्स के लिए IIBF या किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से सर्टिफिकेशन लेना जरुरी किया जाएगा।
रिकवरी एजेंट्स के व्यवहार पर सख्ती
आरबीआई ने रिकवरी एजेंट्स के व्यवहार को लेकर सख्त दिशा-निर्देश प्रस्तावित किए हैं। एजेंट अब सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही कॉल या विजिट कर सकेंगे, जब तक कि उधार लेने वाला व्यक्ति खुद अलग समय तय न करे। गाली-गलौज, धमकी देना, बार-बार फोन करना, मानसिक दबाव बनाना या सोशल मीडिया पर बदनाम करने जैसे तरीकों पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।
ग्राहकों को पहले से देनी होगी जानकारी
बैंकों को अपनी वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सभी वैलिड रिकवरी एजेंसियों की सूची अपडेट रखनी होगी। किसी भी रिकवरी विजिट से कम से कम एक दिन पहले उधार लेने वाले को इसकी सूचना देना जरूरी होगा। यदि एजेंसी बदली जाती है या उसका अनुबंध खत्म होता है तो इसकी जानकारी भी तुरंत शेयर करनी होगी।
मोबाइल फोन और डेटा पर भी नियम
अगर मोबाइल फोन बैंक से फाइनेंस किया गया है तभी कुछ शर्तों के तहत उसकी सुविधाओं को सीमित किया जा सकेगा। हालांकि इमरजेंसी कॉल और पब्लिक सेफ्टी अलर्ट जैसी सेवाएं बंद नहीं की जा सकेंगी। लोन विवाद सुलझने के बाद फोन एक्सेस बहाल करने में देरी होने पर प्रति घंटे 250 रुपये मुआवजा देने का प्रावधान रखा गया है।
रिकॉर्डिंग और डेटा सुरक्षा पर जोर
आरबीआई ने रिकवरी कॉल्स की रिकॉर्डिंग जरुरी करने का प्रस्ताव भी दिया है। यदि किसी उधार लेने वाले की शिकायत लंबित है तो रिकवरी प्रक्रिया तुरंत रोकनी होगी। साथ ही बैंकों और एजेंसियों को उधार लेने वाले के मोबाइल डेटा को एक्सेस करने या इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। नए नियमों का मकसद लोन रिकवरी प्रोसेस को ज्यादा आसान , ट्रांसपेरेंट और फेयर बनाना है।
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