मध्य प्रदेश के इंदौर(Indore) जिले के देवास टोंक कला स्थित पटाखा फैक्ट्री में 14 मई को हुए भीषण अग्निकांड ने बिहार के अररिया जिले के कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। इस दर्दनाक हादसे में गंभीर रूप से झुलसे नरपतगंज प्रखंड के मानिकपुर पंचायत अंतर्गत भवानीपुर गांव निवासी 23 वर्षीय अभिषेक कुमार पासवान की इलाज के दौरान मौत हो गई। अभिषेक, सलूकी पासवान के पुत्र थे और पिछले कई दिनों से इंदौर के एक निजी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे थे।
परिजनों को जैसे ही उनकी मौत की सूचना मिली पूरे गांव में मातम पसर गया। बताया गया कि अभिषेक का शव एंबुलेंस के जरिए उनके पैतृक गांव भवानीपुर लाया जा रहा है। गांव के लोग सुबह से ही उनके घर के बाहर जुटने लगे थे। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। इस हादसे में अब तक अररिया जिले के चार मजदूरों की मौत हो चुकी है।
मौत से इलाके में पसरा मातम
इससे पहले शनिवार को तीन अन्य मजदूरों के शव गांव पहुंचे थे। मृतकों में भवानीपुर वार्ड संख्या पांच निवासी 25 वर्षीय धीरज कुमार, गोखलापुर पंचायत के वार्ड संख्या आठ निवासी 18 वर्षीय अमर कुमार राम और गोखलापुर गांव के 19 वर्षीय अमन कुमार शामिल थे। इन युवकों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
हादसे के बाद से कई परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में जुटे हुए हैं। भवानीपुर गांव के ही 24 वर्षीय बबलू कुमार अब भी लापता बताए जा रहे हैं। परिवार के सदस्य लगातार प्रशासन और स्थानीय लोगों से संपर्क कर उनकी जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सूचना नहीं मिल सकी है।
4 अन्य मजदूरों की हालत गंभीर
इधर, इस हादसे में झुलसे चार अन्य मजदूरों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। घायलों में 20 वर्षीय पिंटू कुमार, 25 वर्षीय अजय कुमार, 25 वर्षीय लालटू कुमार और 50 वर्षीय रामवृक्ष पासवान शामिल हैं। सभी का इलाज इंदौर के अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है और वे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, रोजी-रोटी की तलाश में ये युवक कई महीने पहले इंदौर गए थे। वहां पटाखा फैक्ट्री में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। किसी ने नहीं सोचा था कि रोजगार की तलाश उन्हें इतनी बड़ी त्रासदी के बीच ला खड़ा करेगी।
पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की उठी मांग
घटना के बाद भवानीपुर और आसपास के गांवों में शोक और भय का माहौल है। हर घर में हादसे की चर्चा हो रही है। मृतकों के परिजनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि इतनी बड़ी घटना ने पूरे इलाके को अंदर तक हिला दिया है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता और घायलों के बेहतर इलाज की मांग की है। वहीं, फैक्ट्री में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन किया गया होता तो शायद इतनी बड़ी जनहानि नहीं होती।