CBSE New Marking Scheme: देशभर में इस समय बोर्ड परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों के बीच भारी असमंजस का माहौल बना हुआ है। एक ओर NEET-UG पेपर लीक विवाद ने लाखों छात्रों की मेहनत पर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं दूसरी ओर CBSE की नई मार्किंग स्कीम को लेकर भी बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 12वीं के रिजल्ट में गिरावट के बाद छात्र और अभिभावक ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। बढ़ते विरोध के बीच CBSE को सफाई देने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी है।
CBSE ने रखी अपनी बात
विवाद बढ़ने के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 17 मई 2026 को दो प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कीं। पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस सुबह 11 बजे CBSE मुख्यालय, द्वारका में हुई, जबकि दूसरी दोपहर 12:30 बजे शिक्षा मंत्रालय में आयोजित की गई। इस दौरान विद्यालय शिक्षा सचिव संजय कुमार और CBSE अध्यक्ष राहुल सिंह ने छात्रों की कन्फ्यूजन रिएक्शन दिया।
छात्रों में क्यों बढ़ी नाराजगी?
12वीं बोर्ड परीक्षा में इस बार बड़े स्तर पर ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। इसमें एग्जामिनरर्स ने स्कैन की गई आंसर सीट्स को डिजिटल स्क्रीन पर चेक किया। छात्रों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में उन्हें उम्मीद से कम अंक मिले हैं, जिससे मेरिट और रिजल्ट दोनों प्रभावित हुए हैं। सोशल मीडिया, स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में इस विषय पर लगातार बहस चल रही है।
पिछले 6 साल में सबसे कम रहा पास प्रतिशत
CBSE 12वीं के इस साल के नतीजों ने भी छात्रों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले छह वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2026 में पास प्रतिशत सबसे कम दर्ज किया गया। वर्ष 2021 में 99.37 प्रतिशत, 2022 में 92.71 प्रतिशत, 2023 में 87.33 प्रतिशत, 2024 में 87.98 प्रतिशत और 2025 में 88.39 प्रतिशत छात्र पास हुए थे। वहीं 2026 में यह आंकड़ा घटकर 85.20 प्रतिशत पर पहुंच गया।
बोर्ड ने कहा- पहली बार लागू नहीं हुआ OSM
प्रेस कॉन्फ्रेंस में CBSE अध्यक्ष राहुल सिंह ने कहा कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग कोई नई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत वर्ष 2014 में ही हो चुकी थी और अब इसे फिर से बड़े स्तर पर लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में भी तकनीक आधारित मूल्यांकन प्रणाली अपनाई जाती है और यह प्रक्रिया पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उपयोगी मानी जाती है।
री-इवैल्यूएशन का ऑप्शन रहेगा जारी
CBSE ने साफ किया कि यदि किसी छात्र को अपने नंबर्स को लेकर कोई संदेह है तो वह री-इवैल्यूएशन या रीचेकिंग के लिए आवेदन कर सकता है। बोर्ड के अधिकारियों ने कहा कि छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जा रहा है और पूरी पारदर्शिता के साथ कॉपियों की जांच की जाएगी।
क्या हैं कम नंबर आने के कारण?
एजुकेशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बार केवल ऑन-स्क्रीन मार्किंग ही कम अंकों की वजह नहीं है। CBSE ने इस बार competency-based और analytical questions की संख्या बढ़ाई थी। ऐसे में रटकर पढ़ाई करने वाले छात्रों को कठिनाई का सामना करना पड़ा। कई शिक्षकों के अनुसार फिजिक्स और गणित के प्रश्नपत्र उम्मीद से ज्यादा कठिन थे। पिछले दो वर्षों से बोर्ड परीक्षाओं का स्तर प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जिससे छात्रों के अंक प्रभावित हुए हैं।
ट्वीट कर पहले भी दे चुका है बोर्ड जवाब
विवाद बढ़ने के बाद CBSE ने पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी सफाई दी थी। बोर्ड ने कहा था कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया में एकरूपता और निष्पक्षता बनाए रखना है। बोर्ड के अनुसार इस प्रणाली में एग्जामिनर को स्टेप-बाय-स्टेप मार्किंग करनी होती है, जिससे हर उत्तर का निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित हो सके। CBSE ने दावा किया कि यह प्रणाली लंबे समय से मूल्यांकन प्रक्रिया का हिस्सा है और इससे अलग-अलग क्षेत्रों में अंक देने की प्रक्रिया अधिक सही रहती है।
CBSE’s Commitment to Fair, Transparent and Equitable Evaluation
It has been observed that following the declaration of the CBSE Class XII results, several posts have appeared on social media regarding the assessment under the On-Screen Marking (OSM) system, particularly in…
— CBSE HQ (@cbseindia29) May 15, 2026
Notice for Post Result Declaration Facilities to the Students of Class XII
CBSE remains committed to a fair, transparent, and equitable evaluation process. Class XII students may apply for copies of their evaluated answer books under the Board’s post-result facilities, through…
— CBSE HQ (@cbseindia29) May 15, 2026
सोशल मीडिया पर गुस्सा उतार रहे पेरेंट्स
हालांकि बोर्ड की सफाई के बावजूद सोशल मीडिया पर छात्रों और अभिभावकों की नाराजगी कम नहीं हुई है। कई छात्र कम नंबर मिलने को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ शिक्षकों ने भी मूल्यांकन प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की है।
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