आज के समय में जब दुनिया कई तरह के आर्थिक और भू-राजनीतिक तनावों से गुजर रही है भारत अपनी विकास यात्रा को और तेज करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद (PM-EAC) के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की।
इस बैठक का उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को नई गति देना और बदलते वैश्विक हालात के बीच भारत को अधिक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाना रहा। चर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भारत कैसे बाहरी चुनौतियों के बावजूद स्थिर और तेज आर्थिक वृद्धि बनाए रख सकता है।
आर्थिक मजबूती और विकास की नई रणनीति
बैठक के दौरान विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं ने उन उपायों पर विचार-विमर्श किया जिनसे देश की आर्थिक रफ्तार को और बेहतर किया जा सके। वैश्विक अनिश्चितता, ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत की विकास यात्रा को सुरक्षित रखने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर फोकस किया गया। इसमें निवेश बढ़ाने, उत्पादन क्षमता को मजबूत करने और निर्यात को प्रोत्साहन देने जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सरकार का लक्ष्य है कि भारत को एक ऐसी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया जाए जो बाहरी झटकों के बावजूद स्थिर बनी रहे।
‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पर विशेष ध्यान
इस बैठक का एक महत्वपूर्ण पहलू नागरिकों के जीवन को सरल बनाने और व्यवसायिक माहौल को बेहतर करने से जुड़ा रहा। ‘ईज ऑफ लिविंग’ यानी आम लोगों के दैनिक जीवन को आसान बनाने के लिए सेवाओं की पहुंच डिजिटल सुविधाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार पर जोर दिया गया।
वहीं ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’(Ease of Doing Business) के तहत उद्योगों और उद्यमियों के लिए नियमों को सरल बनाने अनावश्यक बाधाओं को कम करने और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर विचार किया गया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छोटे से लेकर बड़े व्यवसाय बिना किसी जटिलता के आगे बढ़ सकें।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की आर्थिक स्थिति
वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी संघर्षों और आर्थिक अस्थिरता का प्रभाव कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। इसके बावजूद भारत ने अपनी विकास दर को बनाए रखने में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। सकारात्मक अनुमान यह दर्शाते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुधारों की गति इसी तरह जारी रही तो भारत आने वाले वर्षों में और तेज़ी से विकास कर सकता है।