मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के हालिया फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर बताया था, जिसके बाद विवाद और गहरा गया है।
हाई कोर्ट ने भोजशाला को बताया सरस्वती मंदिर
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि भोजशाला परिसर मूल रूप से देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार और (ASI) इस परिसर के प्रशासन और प्रबंधन को लेकर उचित निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। अदालत ने ASI के 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार भोजशाला परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी।
मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
मस्जिद के कार्यवाहक काजी मोइनुद्दीन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस याचिका में हाई कोर्ट के 15 मई के फैसले को चुनौती देते हुए कहा गया है कि मामले पर दोबारा विचार किया जाए। मुस्लिम समुदाय भोजशाला परिसर को कमाल मौला मस्जिद मानता है और लंबे समय से यहां धार्मिक अधिकारों की मांग करता रहा है।
मस्जिद निर्माण के लिए अलग जमीन लेने की सलाह
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि यदि मुस्लिम समुदाय मस्जिद निर्माण करना चाहता है, तो वह मध्य प्रदेश सरकार से जिले में अलग जमीन की मांग कर सकता है। अदालत की इस टिप्पणी के बाद दोनों पक्षों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की कैविएट
हाई कोर्ट के फैसले के बाद हिंदू पक्ष ने भी सुप्रीम कोर्ट में कानूनी तैयारी शुरू कर दी है। हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता जितेंद्र सिंह विशेन ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है। इस कैविएट में अदालत से अनुरोध किया गया है कि भोजशाला मामले में हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर किसी भी अपील पर बिना हिंदू पक्ष को सुने कोई आदेश पारित न किया जाए विशेन ने कहा कि उन्हें नोटिस दिए बिना किसी भी प्रकार का निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए। बता दें कि कैविएट एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसके जरिए कोई पक्ष अदालत को पहले से सूचित करता है कि उसे सुने बिना आदेश न दिया जाए।
धार में सुरक्षा व्यवस्था हाई अलर्ट पर
हाई कोर्ट के फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद सख्त कर दिया गया है। प्रशासन के लिए शुक्रवार का दिन खास तौर पर संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि फैसले के बाद यह पहला शुक्रवार है। करीब 1500 पुलिसकर्मियों और सुरक्षा जवानों को भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में तैनात किया गया है। पूरे इलाके की निगरानी ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए की जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
हिंदू संगठनों का बड़ा धार्मिक आयोजन
हिंदू संगठनों की ओर से भोजशाला में विशेष पूजा-अर्चना कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। अलग-अलग संगठन दोपहर एक बजे अखंड ज्योति मंदिर में एकत्र होंगे, जिसके बाद सामूहिक धार्मिक कार्यक्रम शुरू होगा। दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक मां वाग्देवी की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके अलावा भोजशाला आंदोलन से जुड़े उन लोगों को सम्मानित भी किया जाएगा, जिन्होंने आंदोलन के दौरान संघर्ष किया, घायल हुए या जेल गए।

