दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव और लंबी दूरी के सफर में लगने वाले समय को कम करने के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी डीएनडी-फरीदाबाद-सोहना एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे परियोजना(High-Speed Corridor) तेजी से आकार ले रही है। बुधवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस परियोजना का निरीक्षण किया। इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार के कई मंत्री, सांसद और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
करीब 59 किलोमीटर लंबे इस हाईवे का निर्माण लगभग 4463 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। यह कॉरिडोर दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम और सोहना जैसे प्रमुख शहरों को तेज और सुगम कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। परियोजना पूरी होने के बाद दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगी।
भारतमाला परियोजना के तहत हो रहा विकसित
यह हाईवे भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किया जा रहा है। इसे 6-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर के रूप में तैयार किया जा रहा है, जहां वाहनों की आवाजाही बिना रुकावट के हो सकेगी। इससे न केवल ट्रैफिक जाम में कमी आएगी बल्कि यात्रा का समय भी काफी घटेगा। खासतौर पर दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम से एयरपोर्ट या एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक आधुनिक नेटवर्क आर्च ब्रिज है, जिसकी लंबाई करीब 140 मीटर बताई जा रही है। यह पुल अत्याधुनिक स्टील तकनीक से तैयार किया जा रहा है और इसे देश की उन्नत ब्रिज संरचनाओं में शामिल माना जा रहा है। पुल के निर्माण में टाइड-आर्च तकनीक और क्रॉस्ड हैंगर सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है जिससे इसकी मजबूती और सुरक्षा दोनों बढ़ जाती हैं।
अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल
इसके अलावा निर्माण कार्य में कई आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों को शामिल किया गया है। प्रीकास्ट सेगमेंटल कंस्ट्रक्शन, लॉन्चिंग गर्डर, हाई-स्ट्रेंथ स्टील, हाई-डैम्पिंग रबर बेयरिंग और एडवांस एक्सपेंशन जॉइंट जैसी तकनीकों का उपयोग इस हाईवे को लंबे समय तक टिकाऊ और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।
पर्यावरण संरक्षण को भी इस प्रोजेक्ट में विशेष प्राथमिकता दी गई है। ओखला और गाजीपुर लैंडफिल से बायो-माइनिंग के जरिए निकाली गई करीब 2 लाख मीट्रिक टन निष्क्रिय सामग्री का उपयोग सड़क निर्माण में किया गया है। इससे एक ओर कचरे के बेहतर प्रबंधन में मदद मिली है, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल में भी कमी आई है।
भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी उपलब्धि
हाईवे के किनारों पर नॉइज बैरियर लगाने, हरित पट्टी विकसित करने और बड़े पैमाने पर पौधारोपण की योजना भी बनाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना केवल बेहतर सड़क कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि आधुनिक विकास और पर्यावरण संतुलन का उदाहरण भी बनेगी।
डीएनडी-फरीदाबाद-सोहना हाईवे को दिल्ली-NCR के भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इसके शुरू होने के बाद लाखों लोगों का सफर आसान, तेज और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।