चीन ने अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए लॉन्ग मार्च-10A रॉकेट के पहले स्टेज को सफलतापूर्वक रिकवर किया है। खास बात यह रही कि बूस्टर को समुद्र में मौजूद नेट-आधारित ऑफशोर प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित कैप्चर किया गया। चीन का दावा है कि ऑर्बिटल रॉकेट के बूस्टर की इस तरह की रिकवरी का यह दुनिया का पहला सफल परीक्षण है।
हैनान से लॉन्च हुआ रॉकेट
चीन एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉर्पोरेशन (CASC) के अनुसार, लॉन्ग मार्च-10A रॉकेट को हैनान कमर्शियल स्पेस लॉन्च साइट से उड़ान भरी और लगभग छह मिनट बाद रॉकेट का पहला और दूसरा स्टेज अलग हो गया। इसके बाद पहला स्टेज नियंत्रित तरीके से समुद्र में बने रिकवरी प्लेटफॉर्म की ओर आया और नेट सिस्टम में सुरक्षित उतर गया।
A historic day in China’s space program!
China’s Long March-10B has successfully completed its maiden flight—and recovered its first stage via a sea-based net. This marks the country’s first-ever controlled rocket recovery. A major leap toward reusable launch capabilities.… pic.twitter.com/FWuQXLltaD
— Mao Ning 毛宁 (@SpoxCHN_MaoNing) July 10, 2026
रीयूजेबल तकनीक से घटेगी लॉन्च की लागत
रीयूजेबल रॉकेट तकनीक का लक्ष्य महंगे बूस्टर को हर मिशन के बाद दोबारा इस्तेमाल के लिए सुरक्षित वापस लाना है, जिससे अंतरिक्ष मिशनों की लागत कम हो सके। अब तक स्पेसएक्स जैसी कंपनियां ड्रोन शिप पर रॉकेट की लैंडिंग करती रही हैं, जबकि चीन ने नेट-आधारित रिकवरी सिस्टम का इस्तेमाल कर अलग तरीका अपनाया है।
चंद्र मिशनों और भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रमों को मिलेगा लाभ
लॉन्ग मार्च-10 रॉकेट सीरीज में चीन के मानव चंद्र मिशनों के लिए विकसित किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक से भविष्य में सैटेलाइट लॉन्च, स्पेस स्टेशन से जुड़े अभियान और चंद्र मिशन कम लागत में लॉन्च किए जा सकेंगे। हालांकि समुद्र में नेट के जरिए रॉकेट रिकवर करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसमें रॉकेट की सटीक दिशा, मौसम और समुद्री परिस्थितियों का सही आकलन जरूरी होता है।
Read More
भूस्खलन से यमुनोत्री नेशनल हाईवे का 100 मीटर हिस्सा ध्वस्त, सयानाचट्टी के पास ट्रैफिक पूरी तरह ठप

