Somvati Amavasya 2026 Durlabh Sanyog: इस वर्ष 15 जून, सोमवार को पड़ रही सोमवती अमावस्या कई शुभ संयोगों के कारण विशेष महत्व रखती है। ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर आने वाली यह तिथि स्नान, दान और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत पुण्यदायी मानी जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अखुशियां बटोरने का दिन है कल! सोमवती अमावस्या पर बना दुर्लभ संयोग, स्नान-दान से लगेगी नैया पार, बस करें इन चीजों का दाननुसार इस दिन किए गए शुभ कार्यों से पापों का नाश होता है और जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलने का रास्ता खुल जाता है।
एक साथ बन रहे कई शुभ योग
इस बार सोमवती अमावस्या के साथ मिथुन संक्रांति का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। इसी दिन सूर्य देव वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इसके अलावा यह अमावस्या अधिकमास में पड़ रही है, जो लगभग तीन वर्ष में एक बार आता है। अधिकमास के अधिपति भगवान विष्णु माने जाते हैं, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। ऐसे में यह दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जा रहा है।
सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का प्रभाव
सोमवती अमावस्या के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है। ये दोनों शुभ योग सुबह 05:23 बजे से लेकर शाम 07:08 बजे तक रहेंगे। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए कार्य सफलता प्रदान करते हैं, जबकि अमृत सिद्धि योग को अत्यंत शुभ माना जाता है। इस अवधि में किया गया स्नान, जप, तप और दान विशेष फलदायी माना गया है।
मिथुन संक्रांति का शुभ समय
15 जून को सूर्य देव दोपहर 12 बजकर 59 मिनट पर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे और इसी समय मिथुन संक्रांति प्रारंभ होगी। मिथुन संक्रांति का महा पुण्य काल दोपहर 12:59 पी एम से 03:19 पी एम तक रहेगा। वहीं इसका पुण्य काल दोपहर 12:59 पी एम से शाम 07:20 पी एम तक माना गया है। धार्मिक दृष्टि से इस अवधि में किए गए दान और पुण्य कर्मों का विशेष महत्व बताया गया है।
स्नान-दान से मिलेगा दोगुना पुण्य
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस वर्ष सोमवती अमावस्या और मिथुन संक्रांति एक ही दिन होने से स्नान और दान का फल दोगुना प्राप्त होगा। दोनों पर्वों पर स्नान और दान का विशेष विधान है। ऐसे में श्रद्धालु यदि इस दिन पवित्र नदी, सरोवर या घर पर विधिपूर्वक स्नान कर दान-पुण्य करते हैं तो उन्हें दोनों पर्वों का संयुक्त पुण्य फल प्राप्त हो सकता है।
किन वस्तुओं का करना चाहिए दान
सोमवती अमावस्या के अवसर पर स्नान के बाद अन्न, वस्त्र, कंबल, पंखा और छाता जैसी उपयोगी वस्तुओं का दान करना शुभ माना गया है। चूंकि यह अमावस्या ज्येष्ठ अधिकमास में पड़ रही है, इसलिए जलदान का महत्व और बढ़ जाता है। प्यासे व्यक्ति, पशु या पक्षियों को पानी पिलाना भी पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और मोक्ष का रास्ता मिलता है।
सूर्य दोष से राहत के लिए करें ये दान
मिथुन संक्रांति के संयोग के कारण सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए गेहूं, गुड़, लाल फल, लाल रंग के फूल, नारंगी या लाल रंग के वस्त्र, लाल चंदन, केसर और तांबे का दान करना लाभकारी माना गया है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार ऐसे दान से कुंडली में सूर्य से जुड़े दोष कम होते हैं और करियर तथा मान-सम्मान में वृद्धि के अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
धार्मिक रूप से बेहद खास अवसर
सोमवती अमावस्या, अधिकमास, मिथुन संक्रांति, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का एक साथ बनना इस दिन को अत्यंत दुर्लभ और शुभ बना रहा है। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए यह दिन पूजा, जप, स्नान और दान के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जा रहा है।
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