इस्लामाबाद में ईरान युद्ध को लेकर कूटनीतिक वार्ता की मेजबानी कर रहे पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर की आर्थिक मदद मिली है। पाकिस्तानी मुद्रा में यह रकम करीब 2 खरब 78 अरब रुपये बैठती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कूटनीति में पाकिस्तान की भूमिका का परिणाम भी है।
सऊदी से पहले भी मिला बड़ा पैकेज
इससे पहले 15 अप्रैल को सऊदी अरब पाकिस्तान को बड़ा आर्थिक पैकेज दे चुका है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर का नया कर्ज और पहले दिए गए 5 अरब डॉलर के रोलओवर की अवधि 2028 तक बढ़ाई गई। इस तरह कुल 8 अरब डॉलर की राहत पाकिस्तान को मिली है।
UAE का कर्ज चुकाने का दबाव
पाकिस्तान लंबे समय से विदेशी मुद्रा संकट, महंगाई और कर्ज के दबाव से जूझ रहा है। नई सहायता से कुछ महीनों तक सरकारी खर्च और आयात भुगतान संभालने में मदद मिल सकती है। हालांकि आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह राहत अस्थायी है और मूल समस्याएं अब भी जस की तस हैं। बता दें कि पाकिस्तान को इस महीने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को 3.5 अरब डॉलर का कर्ज लौटाना है। यही वजह है कि नई सहायता को तत्काल राहत के तौर पर देखा जा रहा है। अगर यह भुगतान किया जाता है, तो पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर फिर दबाव बढ़ सकता है।
ईरान संकट पर निभाई सक्रीय भूमिका
ईरान संकट और पश्चिम एशिया के तनाव के बीच पाकिस्तान को अपनी भू-राजनीतिक स्थिति का फायदा मिला है। क्षेत्रीय वार्ताओं की मेजबानी ने उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर सक्रिय भूमिका निभाई, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कूटनीतिक मौजूदगी से आर्थिक हालत नहीं सुधरेगी।
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