पंजाब के किसानों ने शुक्रवार को अपनी मांगों को लेकर चंडीगढ़ की तरफ मार्च निकाले, लेकिन पुलिस ने मोहाली में ही उन्हें रोक दिया। बता दें कि बड़ी संख्या में किसान YPS चौक पर इकट्ठा हुए थे और वहां से राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को मांग पत्र देने के लिए चंडीगढ़ जाने की तैयारी कर रहे थे। प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। चंडीगढ़ की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया और कई जगह बैरिकेड लगाए गए। खासतौर पर सेक्टर-50 की तरफ जाने वाले मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया गया, क्योंकि यह इलाका राजभवन के आसपास माना जाता है।
ट्रैक्टरों से हटाए बैरिकेड
किसानों ने पुलिस रोक के बावजूद आगे बढ़ने के लिए कोशिश किया। प्रदर्शनकारियों ने ट्रैक्टरों पर लगी लोहे की जंजीरों की मदद से बैरिकेड हटाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और पुलिस व किसानों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। स्थिति नियंत्रण से बाहर जाती देख पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके साथ ही आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
पुलिस अधिकारियों के साथ हुई बातचीत
प्रदर्शन के दौरान किसानों की पुलिस अधिकारियों के साथ बातचीत भी हुई। एसएसपी कंवरदीप कौर ने किसान नेताओं से मुलाकात की और उनकी मांगें सुनीं। बाद में पंजाब राज्य भवन की ओर से पहुंचे एक अधिकारी को किसानों ने अपना ज्ञापन सौंप दिया।
किसानों की क्या हैं प्रमुख मांगें?
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किसान संगठनों ने नदी के पानी के बंटवारे को लेकर रिपेरियन सिद्धांत लागू करने की मांग उठाई है। साथ ही ‘पंजाब पुनर्गठन एक्ट’ की कुछ धाराओं को खत्म करने की भी मांग की जा रही है।
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इसके अलावा किसान केंद्र सरकार के प्रस्तावित बिजली संशोधन बिल 2025 और बीज कानून 2025 का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि ये फैसले किसानों के हित में नहीं हैं।
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MSP और बिजली सप्लाई पर भी सरकार से मांग कर रहे हैं।
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किसानों ने सभी फसलों पर MSP की कानूनी गारंटी लागू करने की मांग दोहराई।
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धान सीजन को देखते हुए किसानों ने 24 घंटे बिजली और नहरों के जरिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की मांग भी सरकार के सामने रखी है।
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