हरियाणा पुलिस अपराध होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय अपराध की संभावनाओं को पहले ही खत्म करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी उद्देश्य से गठित RJSF (रोहतक-झज्जर-सोनीपत-फरीदाबाद) यूनिट ने गंभीर अपराधियों का बड़ा डिजिटल डाटाबेस तैयार किया है। इस पहल की समीक्षा पंचकूला में DGP अजय सिंघल की अध्यक्षता में हुई बैठक में की गई।
अपराधियों का तैयार किया डिजिटल डाटाबेस
RJSF यूनिट ने पिछले 10 वर्षों में हत्या, हत्या की कोशिश और अन्य गंभीर अपराधों में शामिल 10,892 अपराधियों का विस्तार से डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया है। इस डाटाबेस में अपराधियों का आपराधिक इतिहास, संपर्क, सामाजिक पृष्ठभूमि और मौजूदा गतिविधियों की जानकारी शामिल है।
गैंगस्टरों की नई भर्ती रोकने पर विशेष नजर
हरियाणा पुलिस का फोकस सिर्फ एक्टिव गैंगस्टरों तक नहीं है। पुलिस उन युवाओं और छोटे अपराधियों की भी निगरानी कर रही है, जिन्हें संगठित गिरोह अपने नेटवर्क में शामिल कर सकते हैं। इसके लिए तकनीकी निगरानी, मानव स्रोतों और फील्ड इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि अपराधी गिरोहों की नई भर्ती पर रोक लगाई जा सके।
तीन साल में 941 अपराधी गिरफ्तार
विशेष कार्य बल (STF) ने भी पिछले तीन वर्षों में बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार वर्ष 2024 में 323, वर्ष 2025 में 470 और वर्ष 2026 में 28 मई तक 148 गैंग सदस्य गिरफ्तार किए गए। इस तरह कुल 941 गैंगस्टर और अपराधी पुलिस के शिकंजे में आ चुके हैं। पुलिस का दावा है कि इन अभियानों से राज्य में संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है। बता दें कि STF के गठन के बाद से अब तक 22 वांछित गैंगस्टरों को विदेशों से डिपोर्ट कर भारत लाया गया है। इसके अलावा 14 अन्य गैंगस्टर विभिन्न देशों में हिरासत में हैं।
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