देश की सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई का रविवार को रायपुर स्थित AIIMS में निधन हो गया। वह लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार थीं और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन से भारतीय लोककला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
पंडवानी को दिलाई वैश्विक पहचान
तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज, अभिनय शैली और अनोखी प्रस्तुति से पंडवानी कला को देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में नई पहचान दिलाई। उन्होंने महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत करने की अपनी विशिष्ट शैली से करोड़ों लोगों का दिल जीता। पुरुष-प्रधान मानी जाने वाली इस कला में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई और आने वाली पीढ़ियों के लिए नई राह तैयार की।
सम्मानों से सजा गौरवशाली सफर
छत्तीसगढ़ की मिट्टी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचीं तीजन बाई को पद्मश्री, पद्म भूषण और बाद में पद्म विभूषण जैसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया गया। उनकी प्रस्तुतियों ने भारत की लोक परंपरा को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जापान, फ्रांस, ब्रिटेन समेत कई देशों में उन्होंने भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया।
भारतीय लोककला जगत में शोक की लहर
तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई राजनीतिक नेताओं, कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थानों ने गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने उनके योगदान को भारतीय लोककला की अमूल्य धरोहर बताया और कहा कि उनका जाना देश की सांस्कृतिक दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है।
तीजन बाई भले ही अब हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन उनकी आवाज, उनकी पंडवानी शैली और भारतीय लोककला के प्रति उनका समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने जिस तरह लोक परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
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