थाईलैंड में वैज्ञानिकों ने चमगादड़ों में एक नए प्रकार के कोरोना वायरस की पहचान की है, जिसे इंसानों के लिए संभावित खतरे के रूप में देखा जा रहा है। यह वायरस कोविड-19 फैलाने वाले SARS-CoV-2 से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल इससे तत्काल महामारी का खतरा नहीं है, लेकिन भविष्य में इसके रूप बदलने की संभावना को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। यह खोज जापान की टोक्यो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर केई सातो के नेतृत्व में की गई। शोध टीम ने थाईलैंड के चाचोएंगसाओ प्रांत में पाए जाने वाले हॉर्सशू बैट्स यानी घोड़े की नाल जैसी चमगादड़ों के नमूनों की जांच के दौरान इस वायरस का पता लगाया। अध्ययन को 6 मई 2026 को वैज्ञानिक जर्नल ‘Cell’ में प्रकाशित किया गया।
SARS-CoV-2 से मिलता-जुलता है वायरस
वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह नया वायरस Clade B समूह से संबंधित है, जो SARS-CoV-2 से जुड़े कोरोनावायरस परिवार का हिस्सा माना जाता है। लैब में किए गए परीक्षणों में यह वायरस फिलहाल कमजोर पाया गया और मौजूदा कोविड टीकों और दवाओं को इसके खिलाफ प्रभावी बताया गया है। शोधकर्ताओं ने बताया कि अभी तक किसी इंसान में इस वायरस के संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद वैज्ञानिक इसे हल्के में नहीं ले रहे, क्योंकि कोरोना वायरस समय के साथ तेजी से म्यूटेट यानी रूप बदलने की क्षमता रखते हैं।
वायरस में बदलाव से बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस वायरस में छोटे स्तर पर भी जेनेटिक बदलाव होते हैं, तो यह अधिक संक्रामक या खतरनाक बन सकता है। वैज्ञानिकों ने संभावना जताई है कि यह वायरस चमगादड़ों के नेटवर्क के जरिए चीन के युन्नान क्षेत्र और उत्तरी लाओस से थाईलैंड तक पहुंचा हो सकता है। चमगादड़ों को लंबे समय से कई तरह के वायरस का प्राकृतिक स्रोत माना जाता है। इसी वजह से एशियाई देशों में इन पर लगातार निगरानी रखने की सलाह दी जा रही है।
कोविड महामारी के बाद बढ़ी सतर्कता
कोविड-19 महामारी के अनुभव के बाद दुनियाभर के वैज्ञानिक नए वायरसों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। इससे पहले भी थाईलैंड में RacCS203 नाम का एक अन्य SARS-CoV-2 संबंधित वायरस पाया जा चुका है विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते ऐसी खोजें होने से भविष्य की संभावित महामारियों को रोकने में मदद मिल सकती है।
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