नाइजीरिया में एक किशोर की कहानी इन दिनों राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बनी हुई है। महमूद सादिस बुबा नाम के नाबालिग लड़के ने खुद को 30 वर्षीय व्यक्ति बताकर संसद चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी थी। “जारिया का अजूबा” नाम से मशहूर महमूद ने दावा किया कि वह एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है, जिसकी वजह से उसका शरीर बच्चों जैसा दिखाई देता है। उसकी बातों पर लोगों ने भरोसा किया और देखते ही देखते वह राजनीति में चर्चा का चेहरा बन गया।
वायरल वीडियो से बढ़ी पहचान
पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब नाइजीरिया की सत्ताधारी पार्टी ऑल प्रोग्रेसिव कांग्रेस (APC) से जुड़ा उसका इंटरव्यू सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में महमूद ने कहा कि वह पहले ड्राइवर का काम करता था और उसका जन्म 1995 में हुआ था। उसने यह भी कहा कि जनता चाहती है कि वह उनकी आवाज बने, इसलिए वह चुनाव मैदान में उतरना चाहता है। उसके बयान के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग उसके समर्थन में उतर आए।
उम्र सीमा पर उठे सवाल
नाइजीरिया में संसद चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 25 साल तय है। महमूद ने खुद को 30 साल का बताकर इस नियम को पूरा दिखाया और पार्टी टिकट पाने के काफी करीब पहुंच गया। हालांकि उसकी लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही कुछ लोगों ने इंटरनेट पर उसके दस्तावेज साझा करने शुरू कर दिए। इनमें जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, राष्ट्रीय पहचान पत्र और स्कूल रिकॉर्ड शामिल थे।
पार्टी ने रद्द की उम्मीदवारी
विवाद बढ़ने पर APC ने महमूद को तुरंत सस्पेंड कर दिया और चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। बाद में महमूद ने भी पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर अपना नाम वापस लेने की जानकारी दी।
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