भारत के एविएशन सेक्टर में इस समय बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। देश की दो प्रमुख एयरलाइंस कंपनियां IndiGo और Air India आने वाले महीनों में अपनी घरेलू उड़ानों की संख्या घटाने जा रही हैं। यह कटौती मुख्य रूप से जून से अगस्त और कुछ मामलों में सितंबर मध्य तक लागू रहेगी।
एयरलाइंस कंपनियों का कहना है कि मौजूदा बाजार परिस्थितियों और यात्रियों की मांग को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। आगे की स्थिति का आकलन करने के बाद ही उड़ानों को दोबारा बढ़ाने या कटौती जारी रखने पर निर्णय होगा।
एयर इंडिया ने ईंधन लागत को बताया बड़ी वजह
एयर इंडिया के अनुसार, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की लगातार बढ़ती कीमतें एयरलाइन इंडस्ट्री के लिए चुनौती बन चुकी हैं। ईंधन लागत बढ़ने से घरेलू उड़ानों का संचालन पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है। इसी कारण कंपनी ने अपने कुछ घरेलू रूट्स पर लगभग 22 प्रतिशत तक उड़ानों में कमी करने का फैसला लिया है।
कंपनी का कहना है कि जिन रूट्स पर यात्रियों की संख्या अपेक्षाकृत कम है वहां फिलहाल उड़ानों की संख्या सीमित की जाएगी। एयर इंडिया लगातार अपने नेटवर्क, यात्रियों की संख्या और ऑपरेशनल खर्चों की समीक्षा कर रही है ताकि स्थिति सामान्य होने पर सेवाओं को दोबारा बहाल किया जा सके।
यात्रियों को दी जाएंगी वैकल्पिक सुविधाएं
एयर इंडिया ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन यात्रियों की फ्लाइटें प्रभावित होंगी, उन्हें असुविधा से बचाने के लिए कई विकल्प दिए जाएंगे। यात्रियों को दूसरी उपलब्ध उड़ानों में सीट देने की कोशिश की जाएगी। इसके अलावा बिना अतिरिक्त शुल्क के यात्रा की तारीख बदलने या नियमों के तहत पूरा रिफंड लेने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। कंपनी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उड़ानों में कटौती का सीधा असर यात्रियों की यात्रा योजनाओं पर कम से कम पड़े।
इंडिगो ने डिमांड में गिरावट को माना कारण
दूसरी ओर, इंडिगो का कहना है कि उसकी उड़ानों में कटौती का मुख्य कारण ईंधन की कीमतें नहीं बल्कि घरेलू यात्रा की मांग में आई कमी है। एयरलाइन के अनुसार जून से सितंबर के बीच कुछ रूट्स पर यात्रियों की संख्या सामान्य से कम रहती है। इसी वजह से कंपनी ने करीब 7 प्रतिशत तक उड़ानों को अस्थायी रूप से कम करने का निर्णय लिया है।
इंडिगो का कहना है कि यदि आने वाले समय में यात्रियों की संख्या बढ़ती है तो जिन उड़ानों को फिलहाल रोका जा रहा है उन्हें दोबारा शुरू किया जा सकता है। एयरलाइन लगातार बुकिंग ट्रेंड और बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
अन्य एयरलाइंस भी अपना रही हैं यही रास्ता
सिर्फ इंडिगो और एयर इंडिया ही नहीं, बल्कि कई अन्य घरेलू एयरलाइंस कंपनियां भी सीमित स्तर पर उड़ानों की संख्या घटा रही हैं। एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून सीजन के दौरान अक्सर घरेलू यात्रा की मांग में कमी आती है। इसके अलावा बढ़ती परिचालन लागत और प्रतिस्पर्धा भी एयरलाइंस कंपनियों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर रही है।
हालांकि, त्योहारों और साल के अंतिम महीनों में यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में एयरलाइंस कंपनियां भविष्य की मांग के अनुसार अपने फैसलों में बदलाव कर सकती हैं।
एविएशन सेक्टर के लिए चुनौतीपूर्ण समय
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय एविएशन सेक्टर इस समय संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ बढ़ती लागत का दबाव है तो दूसरी ओर यात्रियों की बदलती मांग। ऐसे में एयरलाइंस कंपनियां फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाते हुए अपने ऑपरेशंस को नियंत्रित करने में लगी हैं।