श्री अमरनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षाबलों ने जम्मू-कश्मीर में होने वाली एक बड़ी आतंकवादी घटना को असफल कर दिया है। सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के शीर्ष कमांडर जाकिर अहमद गनई को शोपियां जिले में मार गिराया। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस कार्रवाई से श्री अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने की संभावित आतंकी साजिश विफल हुई है।
पांच दिन चला संयुक्त ऑपरेशन
पुलिस के विशेष इनपुट के बाद 3 जुलाई को स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG), भारतीय सेना की राष्ट्रीय राइफल्स की विभिन्न इकाइयों और CRPF ने शोपियां के मीमंदर और छानपोरा क्षेत्र में व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। सुरक्षा एजेंसियों ने CCTV और अन्य निगरानी साधनों के जरिए दो संदिग्ध आतंकियों की गतिविधियां चिन्हित कीं। इसके बाद पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई।
घने सेब के बागानों में चला अभियान
अधिकारियों के अनुसार, घने सेब के बागानों और पेड़ों की वजह से आतंकियों को प्राकृतिक आड़ मिल रही थी। इसे देखते हुए सेना की विक्टर फोर्स ने अतिरिक्त जवानों की तैनाती की और रात में भी निगरानी के लिए विशेष प्रकाश व्यवस्था की गई, ताकि आतंकियों के भागने के सभी संभावित रास्तों को बंद किया जा सके।
TRF के जरिए लश्कर से जुड़ा
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, कुलगाम जिले के मोतलहामा गांव का रहने वाला 26 वर्षीय जाकिर अहमद गनई आठवीं तक पढ़ा था और शटरिंग का काम करता था। सितंबर 2023 में वह घर से काम पर निकला और बाद में लापता हो गया। परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि वह बाद में लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से जुड़ गया। उसके खिलाफ यूएपीए के तहत मामला भी दर्ज था। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि शोपियां दक्षिण कश्मीर को मध्य कश्मीर और पीर पंजाल क्षेत्र से जोड़ने वाला संवेदनशील इलाका है। ऐसे में यहां लश्कर के एक शीर्ष कमांडर का मारा जाना सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
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