तमिलनाडु के करूर भगदड़ मामले में मद्रास हाईकोर्ट(Madras High Court) ने राज्य सरकार को राहत देते हुए हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र जारी करने की अनुमति प्रदान की है। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि ये नियुक्तियां फिलहाल अस्थायी आधार पर ही होंगी और आगे आने वाले न्यायिक फैसलों के अधीन रहेंगी। यानी आखिरी कानूनी फैसले के मुताबिक आगे की स्थिति तय होगी।
राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए ये घोषणा की है कि करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले 32 लोगों के परिजनों को सरकारी सेवा में नियुक्ति दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य हादसे से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना और उनको आगे के लिए संभलने में मदद करना है। आपको बता दें कि नियुक्ति पत्र जल्द ही संबंधित परिवारों को सौंपे जाने की तैयारी की जा रही है।
क्या है मामला ?
यह मामला वर्ष 2025 में करूर में आयोजित एक राजनीतिक रैली के दौरान हुई भगदड़ से संबंधित है। इस घटना में कई लोगों की मौत हुई थी जिसके बाद प्रशासनिक व्यवस्थाओं और सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल उठे थे। इस पूरी घटना को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी लगातार चर्चा और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
पीड़ित परिवारों को मिली उम्मीद
हादसे में अपने डेढ़ वर्षीय बेटे ध्रुवन को खोने वाले विमल ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया के लिए दोबारा बुलाया है और सभी आवश्यक दस्तावेज पहले ही संबंधित कार्यालय में जमा किए जा चुके हैं। उनके अनुसार, यदि सरकारी नौकरी मिलती है तो इससे परिवार को आर्थिक स्थिरता मिलेगी और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में मदद होगी।
इसके साथ ही मद्रास हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियुक्तियां अंतिम न्यायिक आदेश के अधीन रहेंगी। ऐसे में सरकार फिलहाल नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है लेकिन मामले में आगे आने वाले अदालत के फैसले के अनुसार आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं। फिलहाल इस आदेश को प्रभावित परिवारों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है।