एंटी टेररिस्ट फ्रंट इंडिया के अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा(M.S. Bitta) ने हाल ही में वृंदावन में प्रसिद्ध आध्यात्मिक संत संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान बातचीत का एक भावुक पल तब सामने आया, जब एमएस बिट्टा ने संत प्रेमानंद महाराज को अपनी किडनी दान करने की इच्छा जताई। हालांकि, महाराज जी ने बेहद विनम्रता के साथ उनका प्रस्ताव स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
मुलाकात के दौरान एमएस बिट्टा ने अपने जीवन के संघर्षों और देश सेवा से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि भारत-पाकिस्तान सीमा पर तैनाती के दौरान कई बार आतंकवादी हमलों और बम धमाकों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि कई जवान शहीद हुए, लेकिन ईश्वर की कृपा से वह हर बार बच निकले।
वर्तमान परिस्थितियों का किया जिक्र
बिट्टा ने वर्तमान परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि आज सीमावर्ती इलाकों और कश्मीर में माहौल पहले से काफी बदला है। उन्होंने केंद्र सरकार के फैसलों धारा 370 हटाए जाने और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को देश के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने कहा कि पहले चिंता रहती थी कि आने वाली पीढ़ियां देश की सुरक्षा कैसे संभालेंगी लेकिन अब सेना को मजबूत कानूनी और सुरक्षा व्यवस्था मिली है। दुश्मन की किसी भी कार्रवाई का भारतीय सेना मुंहतोड़ जवाब देती है। साथ ही शहीद जवानों के परिवारों के लिए सरकार द्वारा दी जा रही आर्थिक सहायता का भी उन्होंने उल्लेख किया।
महाराज जी ने शांत भाव में दिया जवाब
इसी दौरान M.S. बिट्टा ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने जीवन में बहुत कुछ देख लिया है और अब उनकी इच्छा है कि उनके शरीर के अंग जरूरतमंदों, खासकर घायल सैनिकों के काम आएं। उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से आग्रह करते हुए कहा कि यदि उनकी किडनी किसी काम आ सके तो वह स्वयं को सौभाग्यशाली मानेंगे।
इस पर संत प्रेमानंद महाराज ने शांत भाव से जवाब दिया कि वह ईश्वर की कृपा से संतुष्ट हैं और अपनी वर्तमान स्थिति में भी प्रसन्न हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने जीवन में यह संकल्प लिया है कि वह किसी व्यक्ति से शरीर का अंग या रक्त स्वीकार नहीं करेंगे। हालांकि, उन्होंने एमएस बिट्टा की भावना और सैनिकों के लिए अंगदान के संकल्प की सराहना करते हुए इसे बेहद महान और प्रेरणादायक बताया।