India and Japan Reach Consensus on Indo-Pacific: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘इंडो-पैसिफिक’ से जुड़े फैसले के बीच भारत और जापान ने इसपर अपना रिएक्शन दिया है। नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने मुक्त, खुले और नियम-आधारित ‘इंडो-पैसिफिक’ के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों ने साफ किया कि क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता के लिए ‘इंडो-पैसिफिक’ उनकी साथ में प्राथमिकता बनी रहेगा।
अमेरिकी फैसले के बीच आया जापान का संदेश
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब ट्रंप प्रशासन द्वारा अमेरिकी सेना की एक कमांड के नाम से ‘इंडो’ शब्द हटाकर उसे ‘यूएस-पैसिफिक’ किए जाने के फैसले पर बातचीत हो रही है। ऐसा कहा जा रहा है कि, इस फैसले से भारत को नीचे दिखाने की अमेरिका कोशिश कर रहा है। हालांकि, भारत-जापान शिखर सम्मेलन के संयुक्त बयान में ‘इंडो-पैसिफिक’ शब्द का प्रमुखता से जिक्र किया गया, जिससे जापान ने इसे अपना समर्थन दिया है।
क्वाड सहयोग को मिलेगा नया विस्तार
शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने क्वाड के तहत सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई। साथ ही जापान के अपडेटेड ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ (FOIP) विजन को भारत की समुद्री पहल MAHASAGAR से जोड़ने पर भी सहमति बनी। इसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय साझेदारी को और मजबूत करना है।
विदेश सचिव ने दी बातचीत की जानकारी
विशेष मीडिया ब्रीफिंग में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री ताकाइची के बीच इंडो-पैसिफिक पर चर्चा हुई। अमेरिका के नाम परिवर्तन से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं की बातचीत पूर्व जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे की सोच पर आधारित रही।
शिंजो आबे की सोच का किया गया जिक्र
मिसरी के अनुसार, प्रधानमंत्री ताकाइची ने वर्ष 2007 में शिंजो आबे की भारत यात्रा और भारतीय संसद में दिए गए उनके भाषण ‘Confluence of the Two Oceans’ का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इसी भाषण में आबे ने इंडो-पैसिफिक की अवधारणा को विस्तार से रखा था, जो आज भी भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी का अहम आधार बनी हुई है।
FOIP और MAHASAGAR के बीच बनेगा तालमेल
विदेश सचिव ने बताया कि जापान के अपडेटेड FOIP ढांचे का उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों का लचीलापन बढ़ाना है। यह ढांचा क्षेत्रीय साझेदारों, विशेषकर क्वाड सदस्य देशों को बाहरी दबावों के बीच आर्थिक और सुरक्षा के क्षेत्र में अधिक सक्षम बनाने पर है। प्रधानमंत्री ताकाइची ने कहा कि यह पहल भारत के MAHASAGAR विजन के साथ सीधे जुड़ती है, जिससे दोनों देशों के बीच नौसैनिक और आर्थिक सहयोग का दायरा और व्यापक होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के इस दृष्टिकोण का स्वागत किया।
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